प्रयागराज महाकुंभ: आखिरी वीकेंड पर लाखों की भीड़ से ट्रैफिक जाम, 7 अफसर तैनात!

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महाकुंभ का आज 42वां दिन है और इस पवित्र मेले के समाप्त होने में केवल तीन दिन बचे हैं। जैसे-जैसे अंतिम सप्ताहांत नजदीक आ रहा है, श्रद्धालुओं की भीड़ में इजाफा हो गया है। शनिवार को करीब 1.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। 13 जनवरी से लेकर अब तक, 60 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु इस अद्भुत धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन चुके हैं। सरकार के अनुसार, वर्तमान में दुनिया में लगभग 120 करोड़ सनातनी हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत ने संगम में स्नान कर लिया है। आशा जताई जा रही है कि 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर यह संख्या 65 करोड़ को पार कर जाएगी।

हालांकि, इस भीड़ के चलते मेला क्षेत्र के बाहरी हिस्सों में यातायात की स्थिति अत्यंत कठिन हो गई है। प्रयागराज के सभी सात एंट्री पॉइंट्स पर बाहरी वाहनों को रोक दिया गया है। प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि सभी एंट्री पॉइंट्स पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए एक-एक अधिकारी तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं को शहर के बाहर बने पार्किंग स्थलों में अपनी गाड़ियां पार्क करनी पड़ रही हैं, जहां से संगम की दूरी लगभग 10 से 12 किलोमीटर है। इस व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को कम से कम 10-12 किलोमीटर तक पैदल चलने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने शटल बसें, ई-रिक्शा, ऑटो और ठेले चलने की अनुमति दी है। इसके अलावा, बाइक चलाने वालों की भीड़ भी है, जो सवारी ढोने का काम कर रही है, लेकिन इनसे मनमाने किराए की वसूली की जा रही है। यह स्थिति उन भक्तों के लिए थोड़ी कठिनाई पैदा कर रही है, जो आस्था के चलते इस तकलीफ का सामना कर रहे हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज भी प्रयागराज में रहेंगे और दोपहर 1.45 बजे महाकुंभ में पहुंचेंगे। वे गाडगे महाराज की 149वीं जयंती समारोह में भाग लेंगे। इस दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी महाकुंभ का दौरा करेंगे। इस प्रकार, महाकुंभ के अंतिम चरण में सभी श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह पवित्र उत्सव बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सके।

जैसे-जैसे महाकुंभ का समापन नजदीक आ रहा है, देशभर से श्रद्धालु इस अवसर को संजोने के लिए आ रहे हैं। प्रशासन ने अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत किया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो। इस महापर्व की विशेषता यही है कि यहां अनजानों में भी एक असीमित भाईचारा और एकता देखने को मिलता है। सभी की यही कामना है कि यह धार्मिक प्रतीक और अभिव्यक्ति का स्थान सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।