क्या हॉस्पिटल से हुई थी ‘लगान’ की डायरेक्शन? देखें कैसे थे अजीब शूटिंग के हालात!

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फिल्म जगत में कई फिल्में हैं जो अपने प्रोडक्शन से पहले ही तारीख बन जाती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘लगान’, जिसे डायरेक्टर अपूर्व लखिया ने एक साक्षात्कार के दौरान कई कठिनाईयों के बारे में बताया है जिनका सामना शूटिंग के दौरान करना पड़ा। अपूर्व ने खुलासा किया कि फिल्म के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर को सेट पर काम करते समय स्लिप डिस्क की समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान भी गोवारिकर ने अपने अस्पताल के बिस्तर से ही फिल्म के कुछ महत्वपूर्ण दृश्य निर्देशित किए। इससे पता चलता है कि फिल्म बनाने के प्रति उनके समर्पण और मेहनत की किन सीमाओं तक पहुँचा जा सकता है।

शूटिंग के दौरान मनोरंजन के साधनों की कमी के चलते फिल्म के मुख्य अभिनेता आमिर खान ने अपने तनाव को दूर करने का एक अनूठा तरीका निकाला। जब आमिर बोर होने लगे, तो उन्होंने गुजरात के शतरंज चैंपियंस को सेट पर बुलवा लिया। ब्रेक टाइम में आमिर उनके साथ शतरंज खेलते थे और कभी-कभी ताश का खेल भी होता था। अपूर्व ने यह भी कहा कि ऐसा माहौल फिल्म के कलाकारों के लिए राहत का काम करता था, जिससे वे अपनी भूमिका में और भी निपुणता के साथ लौट सकते थे।

अपूर्व ने यह भी बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें एक महत्वपूर्ण सीन को पूरी तरह से काटना पड़ा था। इस सीन में रात के समय एक मैच को दर्शाया जाना था, जिसमें सेट पर लोग मशालों के साथ खड़े थे, नंगे पैर और धोती-बनियान पहने हुए। उन्होंने बताया कि ऐसे कठिन हालात में भी कलाकारों का हिम्मत और मेहनत बनी रही, जिसने ‘लगान’ को सफल फिल्म के रूप में स्थापित करने में मदद की।

फिल्म ‘लगान’ 2001 में रिलीज हुई थी और इसने न केवल दर्शकों के दिलों को जीता, बल्कि ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भी नामांकित हुई थी। आमिर खान ने इस फिल्म में भुवन नामक एक गहरी भूमिका निभाई थी। यह फिल्म बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म श्रेणी में ऑस्कर के लिए नॉमिनेट की गई थी लेकिन इसे अपनी लंबाई के कारण पुरस्कार नहीं मिल सका।

इस प्रकार, अपूर्व लखिया का यह साक्षात्कार दर्शाता है कि ‘लगान’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह अपने पीछे की कहानी, मेहनत और संघर्ष का जीता-जागता उदाहरण है। फिल्म उद्योग के लिए यह एक प्रेरणा बनी हुई है कि किस प्रकार कठिनाईयों के बावजूद समर्पण और मेहनत से एक महान कृति का निर्माण किया जा सकता है। ‘लगान’ की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है और यह साबित करती है कि सच्ची कला हमेशा अपनी मेहनत और लगन से सफल होती है।