ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हाल ही में भारत की ऐतिहासिक धरोहर फतेहपुर सीकरी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद अपने गाइड शमशुद्दीन से बातचीत करते हुए कहा, “यह वही जगह है, जिसे मैंने कई साल पहले फिल्म परदेस में देखा था। उस समय मैंने सोचा था कि एक दिन अपने बच्चों को इस अद्भुत स्थान पर लाऊंगा। आज का यह अनुभव मेरे लिए बहुत खास है। मैं अब वापस जाकर अपने बच्चों को इस फिल्म का दिखाऊंगा, जिसमें यहां के दृश्य कैद किए गए हैं।” यह जानकारी गाइड शमशुद्दीन ने दैनिक भास्कर को दी।
शमशुद्दीन ने सुनक और उनके परिवार के बारे में बताया कि वे बेहद विनम्र और साधारण लोग हैं। उन्हें ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह किसी वीवीआईपी के साथ हैं, बल्कि यह अनुभव एक सामान्य पर्यटक के साथ होने जैसा था। सुनक जी की ताजमहल और फतेहपुर सीकरी में भ्रमण के दौरान शमशुद्दीन ने देखा कि कैसे सुनक जी ने अपने गाइड के साथ मित्रवतता से चर्चा की, कभी उनके कंधे पर हाथ रखा तो कभी मुस्कुराते हुए सवाल पूछे।
फतेहपुर सीकरी में, जब वे शेख सलीम चिश्ती की दरगाह पहुंचे, तब सुनक ने अपने बच्चों को यह बताया कि यह वही स्थान है जहां परदेस फिल्म में कव्वाली का दृश्य फिल्माया गया था। इसके साथ ही, सुनक की सास सुधा नारायण मूर्ति ने इस स्थान पर कई सीन शूट होने का जिक्र करते हुए याद किया कि फिल्म का अंतिम मुकाबला यहीं फिल्माया गया था। दरगाह पर पहुँचकर, सुनक के परिवार ने चादर चढ़ाई और विशेष मन्नत का धागा भी बांधा।
सुनक के भारतीय मूल की पत्नी अक्षता और उनके बच्चों के साथ बातचीत में शमशुद्दीन ने यह भी बताया कि ऋषि सुनक और उनकी पत्नी को हिंदी बहुत अच्छी तरह से आती है। इस दौरान, सुनक जी ने हिंदी में संवाद स्थापित किया, जबकि उनकी बेटियां अंग्रेजी में बात कर रही थीं। यह जानकर शमशुद्दीन को आश्चर्य हुआ कि उन्होंने भारत में रहने के बावजूद हिंदी को बनाए रखा है।
सुनक ने यह भी बताया कि वे पहले भी ताजमहल देख चुके हैं, लेकिन वर्तमान में जो व्यवस्थाएं और सुरक्षा व्यवस्था देखी हैं, वह पहले की तुलना में काफी बेहतर हैं। उन्होंने बताया कि 18-20 साल पहले जब वह ताजमहल आए थे, तब सिक्योरिटी इतनी सख्त नहीं थी। इसके अलावा, सुधा नारायण मूर्ति ने ताजमहल में हिंदू साइन के बारे में सवाल किए और इस विषय पर बातचीत की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इतिहास के प्रति उनका ज्ञान गहरा है।
सुनक का यह यात्रा न केवल एक पर्यटन अनुभव था, बल्कि भारतीय संस्कृति और धरोहर के प्रति उनके इम्यूनिटी का प्रतीक भी था। उन्होंने भारतीय स्मारकों और उनके रख-रखाव के विषय में भी चर्चा की और अंग्रेजों द्वारा किए गए ऐतिहासिक नुकसान के प्रति जागरूकता जताई। उनके इस दौरे से यह संदेश मिला कि वे भारत की समृद्ध संस्कृति को समझने और सम्मान देने के प्रति गंभीरता दोहराते हैं।