फतेहाबाद: नर नीलगायों को मारने का परमिट देने पर बिश्नाेई समाज ने किया विराेध प्रदर्शन
फतेहाबाद, 10 फरवरी (हि.स.)। नीलगायों को मारने के लिए परमिट देने के अनुमति के विरोध में बिश्नोई समाज के लोगों ने सोमवार को अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के नेतृत्व में रोष जताया। सभा द्वारा जिला उपायुक्त मनदीप कौर को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपकर इस अनुमति पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। इस अवसर पर विनोद काकड़ महासचिव, राधेश्याम सिहाग जिला प्रधान, अनिल सिहाग पूर्व जिला अध्यक्ष, पूर्ण कालीरावण, एडवोकेट समीर सियाग, एडवोकेट विष्णु दत्त मांझू, एडवोकेट बिन्दर मांझू, शिवकुमार भादू धांगड़, आत्माराम सहारण गोरखपुर, रामचंद्र डेलु गोरखपुर सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे। सभा सदस्यों ने कहा कि हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है जहां किसान वर्ग हमेशा से वन्य जीवों के साथ संतुलन बनाते हुए खेती कार्य करता रहा है। अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है कि किसी भी किसान या अन्य संगठन की तरफ से नील गायों को मारने की मांग की गई हो। हरियाणा में कोई भी समाज ऐसे अमानवीय कृत्य को स्वीकार नहीं करता है लेकिन फिर भी सरकार ने बिना सोचे समझे नीलगायों को मारने का परमिट देने को अनुमति दे दी है। यह आदेश बीजेपी सरकार की छवि के विरूद्ध है। सभा के प्रतिनिधियों ने 17 दिसंबर 2024 को मुख्य वन अधिकारी और 4 जनवरी 2025 को वन मंत्री से मिलकर नीलगायों की समस्या के मामले में विशेष योजना बनाकर अन्य राज्यों के जंगों में विस्थापित करने या विशेषज्ञों से राय लेकर नसबंदी करने व प्रभावित किसानों को मुआवजा देने जैसी नीति पर विचार करने के सुझाव दिए थे लेकिन फिर भी सरकार ने ऐसा आदेश जारी कर दिया, जिससे प्रदेशभर के सर्वसमाज में रोष है। उन्होंने मांग की कि वन्य प्राणी संरक्षण कानून 1972 की धाराओं में बदलाव करते हुए नील गायों को मारने के परमिट की अनुमति पर यथाशीघ्र रोक लगाई जाए और वन्य जीव प्रेमियों और बिश्नोई समाज के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर अन्य विकल्पों पर विचार किया जाए।