पंजाब के अमृतसर जिले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए एएसआई गुरजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। 55 वर्षीय यह आरोपी खुद को सीआईए स्टाफ बताकर लोगो से रिश्वत मांगता था। आरोपी न्यू प्रताप नगर के अल्फा मॉल के सामने का निवासी है। पुलिस ने आरोपी से गहन पूछताछ प्रारंभ कर दी है, ताकि इस मामले की सच्चाई का पता लग सके।
इस मामले की शुरुआत 1 फरवरी को हुई, जब शाम के समय एक व्यक्ति के घर में पांच लोग घुस गए। इन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताकर घर की तलाशी के बहाने में प्रवेश किया। जब पीड़ित ने बाद में सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की, तो पाया कि उसकी अलमारी से 1.60 लाख रुपये गायब हो गए थे। पीड़ित ने आरोपियों में सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर सुरिंदर मोहन और एएसआई गुरजीत सिंह की पहचान की।
पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर और डीसीपी आलम विजय सिंह के आदेश पर कार्रवाई करते हुए, 6 फरवरी को पुलिस ने गुरजीत सिंह को अल्फा मॉल के पास से गिरफ्तार कर लिया। इस बीच, यह भी सामने आया कि आरोपी पर पहले से ही विजिलेंस थाने में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है। जांच में पता चला कि आरोपियों ने पीड़ित से एक लाख रुपये की धनराशि की मांग की थी और जाते समय उससे बिना अनुमति 5 हजार रुपये भी ले लिए थे।
आरोपी को पुलिस हिरासत में रखकर कड़ी पूछताछ की जा रही है, और अन्य संलग्न आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला मोहकमपुरा थाने में दर्ज किया गया है और आरोपी को कोर्ट में पेश कर दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। मामला अब भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया है, जिसमें एएसआई गुरजीत सिंह और अन्य आरोपियों की संदिग्ध गतिविधियों की जांच जारी है।
पूरे मामले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वादी ने 7 फरवरी को जानकारी दी कि जिस दिन आरोपी उसके घर आए थे, उन्होंने एक लाख रुपये की मांग की थी और जाते समय उसकी जेब से 5 हजार रुपये forcibly निकाल लिए थे। पुलिस अब अन्य आरोपियों की खोज में जुटी है और मामले को तटस्थता और समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। प्रकरण को संबंधित धाराओं के तहत मोहनपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है, जिससे यह साफ होता है कि इस तरह की गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा।
अमृतसर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल आरोपी के खिलाफ सख्त कदम है, बल्कि साथ ही समाज में एक सख्त संदेश भी है कि पुलिसकर्मी यदि सामाजिक सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, तो उन्हें किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत बनाती है।