बड़ी महापंचायत की तैयारी: डल्लेवाल का 2.19 मिनट का वीडियो, 72वें दिन अनशन जारी!

Share

पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चल रही किसान आंदोलन को 13 फरवरी को एक साल पूरा होने जा रहा है। इस अवसर को देखते हुए, किसान संगठनों ने 11 से 13 फरवरी तक होने वाली महापंचायतों का सफल आयोजन करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। इस महापंचायत का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि 14 फरवरी को चंडीगढ़ में केंद्र सरकार के साथ किसानों की महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है। इसी बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की भूख हड़ताल का आज 72वां दिन है। उन्होंने कल 2.19 मिनट का एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने सभी किसानों से महापंचायत में भाग लेने का अनुरोध किया।

डल्लेवाल ने हरियाणा के किसानों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस आंदोलन की ताकत बढ़ाने के लिए खनौरी बॉर्डर पर पानी लाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा कदम है और हम इसके लिए हरियाणा के किसानों के आभारी हैं। उन्होंने सभी किसानों से आग्रह किया कि वे 12 फरवरी को महापंचायत में शामिल हों, जिससे आंदोलन को और ऊर्जा मिलेगी। डल्लेवाल ने यह भी कहा कि, उनके शरीर की क्षमता भले ही बैठक में जाने के लिए नहीं हो, लेकिन किसानों की ऊर्जा से वे वहां अपने मुद्दों को मजबूती से रख सकेंगे।

महापंचायत में अलावा, 6, 8 और 10 फरवरी को हरियाणा के किसान अपने खेतों से जल लेकर खनौरी मोर्चे पर पहुंचेंगे। मंगलवार को, हरियाणा के 50 गांवों के किसान अपने खेतों के ट्यूबवेल का पानी लेकर पहुंचे थे। किसान नेताओं ने बताया कि डल्लेवाल केवल जल ग्रहण कर रहे हैं, ताकि किसानों की भूमि एवं उनकी अगली पीढ़ी के भविष्य की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि यह जल सिर्फ पानी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की भावना है, जो मंडी मूल्य समर्थन (MSP) पर गारंटी कानून के लिए जारी आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) भी केंद्रीय कृषि मार्केटिंग पॉलिसी ड्राफ्ट के खिलाफ एक बार फिर सक्रिय हो गया है। 9 फरवरी को, किसान पूरे देश में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को मांग पत्र सौंपेंगे। इसके अलावा, 15 फरवरी को चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें आगे की आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक से पहले, मोर्चे की एकता की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। SKM द्वारा खनौरी और शंभू मोर्चे को एकता के लिए पत्र भेजा गया है, हालाँकि मीटिंग की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इस बीच, पंजाब सरकार ने पिछले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के पारिवारिक सदस्यों को नौकरी मुहैया करने की प्रक्रिया में तेजी लाई है। अब तक, 597 पारिवारिक सदस्यों को विभिन्न विभागों में नौकरियां दी गई हैं। कृषि मंत्री ने बताया कि यह प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी और अब सफलता के साथ किसानों के परिवारों को राहत मिली है। यह कदम उन परिवारों के लिए एक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकता है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस संघर्ष में खोया है।