पंजाब के चीफ सेक्रेटरी सहित 6 को लीगल नोटिस: पार्किंग विवाद पर डिप्टी मेयर की कार्रवाई!

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पंजाब के मोहाली जिले में पार्किंग से उत्पन्न समस्याओं को लेकर नगर निगम के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने राज्य सरकार के चीफ सेक्रेटरी और अन्य छह विभागों के प्रमुखों को कानूनी नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में डिप्टी मेयर ने बताया कि 2009 में जो पार्किंग गाइडलाइन बनाई गई थी, अब उसमें बदलाव की आवश्यकता है क्योंकि 16 वर्षों में शहर के हालात काफी बदल चुके हैं। मौजूदा समय में मोहाली एक कॉमर्शियल, आईटी और मेडिकल हब बन चुका है, जिसके कारण पार्किंग की समस्याएँ और अधिक गंभीर हो गई हैं। बेदी ने कहा कि शहर में पार्किंग को लेकर लगातार झगड़े हो रहे हैं, जिससे नागरिकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कुलजीत सिंह बेदी ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उन्होंने नोटिस में यह भी उल्लेख किया कि मोहाली का तेजी से विकास हो रहा है, और हाल के वर्षों में कई अस्पतालों और कंपनियों का आगमन हुआ है। ये कंपनियाँ उन साइटों का उपयोग कर रही हैं जिन्हें ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) द्वारा अभी तक ऑक्शन नहीं किया गया है, और जिन्हें भविष्य में बेचा जाएगा। बेदी ने अधिकारियों को इस स्थिति की गंभीरता बताते हुए कई महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख पत्र में किया है साथ ही संबंधित फोटोग्राफ्स भी मुहैया कराए हैं।

इसके अलावा, डिप्टी मेयर ने सभी संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को वह लंबे समय से उठा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों की भागीदारी और गंभीरता की कमी उन्हें काफी निराश कर रही है।

मोहाली में पार्किंग विवादों की गंभीरता को समझाने के लिए एक दुखद घटना का उल्लेख भी आवश्यक है, जिसमें 27 फरवरी 2013 को मोहाली के एक रिहायशी इलाके में पार्किंग विवाद के चलते वरिष्ठ अधिवक्ता अमरप्रीत सिंह सेठी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने 2017 में सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जो दर्शाता है कि पार्किंग से जुड़ी समस्याएँ केवल नागरिकों की दैनिक जिंदगी ही नहीं, बल्कि कानून और व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

इस प्रकार, डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी का कानूनी नोटिस एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह स्पष्ट करता है कि मोहाली के नागरिकों की सुविधाओं की सुरक्षित भविष्य के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। अगर संबंधित विभाग इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो नागरिकों की समस्या और बढ़ सकती है, और यह स्थिति और भी अधिक जटिल हो जाएगी।