लुधियाना जेल में कैदियों की खूनी भिड़ंत: एक कैदी गंभीर रूप से घायल! - सरस जनवाद

लुधियाना जेल में कैदियों की खूनी भिड़ंत: एक कैदी गंभीर रूप से घायल!

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लुधियाना की सेंट्रल जेल में बीती रात एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां कैदियों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। जेल में बंद विचाराधीन कैदी हरदीप सिंह पर 8 से 10 अन्य बंदियों ने बुरी तरह से हमला कर दिया। हमलावरों ने उसके सिर पर स्टील के गिलास और कड़े से वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही जेल प्रशासन ने उसे तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसके सिर पर 8 टांके लगाए। गंभीर घायल हरदीप सिंह गुरु अर्जुन देव नगर का निवासी है और पिछले 2 वर्षों से जेल में बंद था।

हरदीप के अनुसार, वह रात के समय अपनी बैरक में मौजूद था, तभी अचानक कुछ कैदियों ने उसे घेर लिया और उस पर हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार, पहले की घटनाओं की तरह यह भी जेल के भीतर की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक सवाल खड़े करता है। हरदीप सिंह का रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि उसे दो साल पहले लूट की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और वह तब से न्यायिक हिरासत में है। जेल में इस प्रकार की हिंसा न केवल कैदियों के बीच झगड़े को दर्शाती है, बल्कि यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर भी इशारा करती है।

गौरतलब है कि लुधियाना की सेंट्रल जेल में यह पहला मामला नहीं है, जहां कैदियों के बीच मारपीट या हमले की घटनाएं हुई हैं। इससे पहले भी कई बार जेल के भीतर इस प्रकार के हिंसक झगड़े देखने को मिले हैं, जो दर्शाते हैं कि जेल प्रशासन को सुरक्षा मामलों में अधिक गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। इस घटना के बाद, थाना डिवीजन नंबर 7 की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वे यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस हमले के पीछे क्या कारण थे और इसमें शामिल कैदियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है।

एसी घटनाओं के चलते यह प्रश्न उठता है कि क्या जेल में कैदियों की सुरक्षा को लेकर प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं। जेल में इस प्रकार के संघर्षों से न केवल कैदियों की सुरक्षा को खतरा होता है, बल्कि यह समाज के प्रति भी एक नकारात्मक संकेत भेजता है। समाज में यह धारणा बन सकती है कि जेलों में न केवल अपराधियों की बड़ी संख्या है, बल्कि वहां की परिस्थितियों भी नियंत्रण से बाहर हैं। ऐसे में जिम्मेदार संस्थाओं को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हिंसक मामलों की पुनरावृत्ति न हो।