मोदी-योगी ने मौनी अमावस्या के अमृत स्नान को सम्भाला, पूरे प्रशासन को साधुवाद : चिदानंद सरस्वती
सीएम योगी के दिव्य चरित्र पर शांतनु द्वारा रचित कृति का व्यासपीठ ने किया विमोचन-महाकुम्भ का दिव्य संदेश, भारत अपना इतिहास पुनः गढ़ रहा : धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री
महाकुम्भ नगर, 29 जनवरी (हि.स.)। महाकुम्भ मेले के परमार्थ निकेतन में चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस महाकुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान है। उनके मार्गदर्शन में मौनी अमावस्या के अमृत स्नान को संभालने का कार्य सफलता से सम्पन्न हुआ। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को संजीवनी देने का एक प्रयास है। उनकी सोच और कार्यशैली का अभिनन्दन।
महाकुम्भ क्षेत्र के परमार्थ निकेतन शिविर, परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में आयोजित हनुमंत कथा का आज विराम हुआ। 30 जनवरी को संत समागम और दिव्य दरबार लगेगा। महाकुम्भ के दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर और त्रिवेणी पुष्प में चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में बागेश्वर धाम सरकार, आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के मुख से हो रही हनुमंत कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय को श्रद्धा व भक्ति से भर दिया।
चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अखाड़ा परिषद और संतों ने आज मौनी अमावस्या का अमृत स्नान पहले राष्ट्र को कराया और फिर स्वयं किया। यह पूरे विश्व को अद्भुत संदेश दे रहा है। अखाड़ा परिषद का योगदान, उदारता और निर्णय अतुलनीय है। यह भारत के इतिहास का अद्भुत दृश्य है जहां पूज्य संतों द्वारा श्रद्धालुओं को प्रथम व सर्वोत्तम अमृत योग में स्नान का अवसर प्रदान किया गया। उहोंने कहा कि भारत में श्रद्धा और आस्था की जड़ें अत्यंत गहरी हैं। भारतवासियों की श्रद्धा और आस्था ने सनातन संस्कृति को न केवल जीवित रखा बल्कि उसे शिखर तक पहुंचाया। भारत की संस्कृति, आदर्श और परम्पराएं अत्यंत प्राचीन और महान हैं।
बागेश्वर धाम सरकार आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने महाकुम्भ के दौरान एक महान पहल की घोषणा की, जिसके अंर्तगत बागेश्वर धाम मंदिर परिसर में एक विशाल अस्पताल की स्थापना की जाएगी। उनकी यह घोषणा निश्चित रूप से समाज के कमजोर वर्गों के लिए एक वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ एक ऐसा अवसर है जब भारत अपना इतिहास पुनः गढ़ रहा है। महाकुम्भ के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत की संस्कृति, धर्म और परम्पराएं हमेशा जीवित रहेंगी और उनका संरक्षण करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि संगमतट पर जो घटना घटी वह हृदय विदारक है। हताहतों और पीड़ितों को हनुमानजी शक्ति व बल प्रदान करें। उन्होंने कहा कि तन बचेगा तो ही धर्म रहेगा, धर्म रहेगा तो देश रहेगा और देश रहेगा तो भारत विश्व गुरू बनेगा। आने वाले सभी स्नान संयम का संगम मानकर स्नान करें।
साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि महाकुम्भ तीर्थराज प्रयाग की भूमि अद्भुत ऊर्जा की भूमि है। प्रार्थना में बड़ी शक्ति होती है, भक्ति की शक्ति अद्भुत है। महाकुम्भ भक्ति की शक्ति का अद्भुत दर्शन कराती है। हम सभी को श्रद्धा व भक्ति के साथ संयम व धैर्य से कार्य करना होगा।
—————