झोटा की मौत को जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने बताया कौमी शहीद

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मानसा, 16 अक्टूबर । अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की मौत को शहादत करार देते हुए उन्हें ‘शहीद भाई परविंदर सिंह’ कहा है। उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि न्याय की लड़ाई में सिख समुदाय पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

शुक्रवार को मानसा में डिप्टी कमिश्नर के आवास के पास टिकौनी में चल रहे धरने में पहुंचे ज्ञानी गड़गज ने सवाल उठाया कि मामले में थाने के प्रभारी (एसएचओ) को निलंबित करना क्या पर्याप्त कार्रवाई है। उन्होंने सरकार से नशा तस्करी के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि भाई परविंदर सिंह ने नशे के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान दी है। वह शहीद हुए हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि एसएचओ को निलंबित करने से क्या मामला हल हो जाएगा? यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का सवाल है।

ज्ञानी गड़गज ने कहा कि अकाल तख्त साहिब के मार्गदर्शन में सिख समुदाय संघर्ष कमेटी की ओर से घोषित किए जाने वाले अगले कार्यक्रम का समर्थन करेगा। उन्होंने लोगों से पीड़ित परिवार के समर्थन में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह गुरु साहिब के समक्ष अरदास करते हैं और परिवार को भरोसा दिलाते हैं कि समुदाय हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर एक परविंदर को शहीद करोगे तो हजारों और उठ खड़े होंगे। सिखों और पंजाबियों को मारा जा सकता है, लेकिन उन्हें मिटाया नहीं जा सकता।

ज्ञानी गड़गज ने घोषणा की कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) घटना में घायल हुए लोगों के इलाज का खर्च उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परविंदर सिंह के पिता से बातचीत की गई है और प्रभावित परिवारों की सहायता करना सिख संस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि बड़ू साहिब के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी और परविंदर सिंह के दोनों बेटों की पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की थी। एसजीपीसी के अध्यक्ष शनिवार को परिवार से मुलाकात करेंगे।

ज्ञानी गड़गज ने पंजाब के युवाओं के लिए नशे की उपलब्धता को गंभीर खतरा बताते हुए सवाल किया कि प्रतिबंध के बावजूद नशीले पदार्थों की बिक्री कैसे जारी है। उन्होंने सिंथेटिक ड्रग्स और नशे के लिए दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि राज्य में ‘नशे की छठी नदी’ बह रही है।

उन्होंने इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि यह संघर्ष पंजाब के युवाओं को बचाने के लिए है, न कि हिंदुओं और सिखों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए। उन्होंने राज्यव्यापी बंद के दौरान मिले समर्थन को सभी समुदायों की एकजुटता का उदाहरण बताया।