जयपुर, 04 अप्रैल । राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एसआई भर्ती-2021 की परीक्षा को रद्द करने वाले एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को कहा है कि पेपरलीक में लिप्त हुए लोगों को हटाने की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। वहीं अदालत ने यह भी कहा कि आरपीएससी में राजनीति के आधार पर चयन नहीं होना चाहिए और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए कानून लाया जाना चाहिए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार व अन्य की ओर से दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए दिए। खंडपीठ ने गत 19 जनवरी को सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
खंडपीठ ने आरपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय और तत्कालीन सदस्य मंजू शर्मा और संगीता शर्मा सहित अन्य की अपीलों को भी खारिज कर दिया है। वहीं अदालत ने एकलपीठ की ओर से आरपीएससी की कार्यशैली को लेकर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर दर्ज याचिका को भी रद्द किया है। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष व सदस्यों ने अपील में एकलपीठ की ओर से दिए फैसले में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की गुहार की थी।
असफल अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर आरपी सिंह और अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने परीक्षा रद्द करने की गुहार करते हुए कहा था कि आरपीएससी के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने परीक्षा से 35 दिन पहले तत्कालीन सदस्य रामूराम राइका को पेपर दिया था। कटारा ने अपने ड्राइवर के बेटे अजय प्रताप सिंह, रिश्तेदार विजय डामोर व राहुल कटारा, शिक्षक कुंदन, सहायक लेखाधिकारी संदीप कुमार व पुरुषोत्तम दाधीच, शिवसिंह एवं तत्कालीन पीएसओ राजकुमार यादव को भी पेपर दिया। राइका ने बेटे-बेटी को यह पेपर दिया था। भर्ती में दोषियों की छंटनी मुश्किल है। इसलिए इसे रद्द किया जाए। इसके विरोध में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद, सफल अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर एन माथुर, वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने कहा कि पेपर लीक व्यापक स्तर पर नहीं हुआ था और दोषियों की छंटनी संभव है। वहीं कुछ चयनित अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि वे पुरानी नौकरी छोडकर आए थे और जांच में वे बेदाग निकले हैं। ऐसे में भर्ती रद्द करना ठीक नहीं है।