मंडी, 10 अप्रैल । सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के इतिहास विभाग द्वारा महान यायावर, बहुभाषाविद् एवं प्रख्यात साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन की जयंती के उपलक्ष्य में एक विद्वत संगोष्ठी एवं अनुभव-साझा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्वालियर शैक्षणिक भ्रमण में सहभागी विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने अपने प्रेरक संदेश में कहा कि राहुल सांकृत्यायन का जीवन इस तथ्य का साक्षात प्रमाण है कि ज्ञान केवल औपचारिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहता बल्कि सतत यात्रा, अनुभव और जिज्ञासा के माध्यम से वह विस्तृत एवं समृद्ध होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि वे अपने शैक्षणिक भ्रमण के अनुभवों का गंभीरतापूर्वक लेखन करें तथा उन्हें प्रकाशन योग्य रूप में प्रस्तुत करें जिससे अनुभवजन्य ज्ञान का विस्तार हो सके।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता छात्र कल्याण अधिष्ठाता आचार्य राजेश कुमार शर्मा ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में राहुल सांकृत्यायन के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनकी दार्शनिक दृष्टि तथा यात्रा-आधारित ज्ञानमीमांसा पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांकृत्यायन के यात्रा-वृत्तांत केवल वर्णनात्मक साहित्य नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं जो ज्ञान परंपरा को नवीन दृष्टि प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन का जन्म 9 अप्रैल1893 को आजमगढ़ में हुआ था ,उनका मूल नाम केदारनाथ पांडेय था। बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षण के पश्चात उन्होंने राहुल नाम धारण किया। वे हिंदी, संस्कृत, पाली एवं तिब्बती भाषाओं के असाधारण विद्वान थे तथा उन्होंने सौ से अधिक ग्रंथों की रचना की । उन्होंने राहुल सांकृत्यायन की मंडी यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार उनसे प्रभावित होकर मंडी में पुरातत्व संरक्षण एवं साहित्य सृजन हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक अनुभवों को साझा करते हुए ग्वालियर सर्कल की ऐतिहासिक धरोहरों के अध्ययन को एक ज्ञानवर्धक एवं दृष्टि विस्तारक अनुभव बताया। प्रतिभागी विद्यार्थियों में सानू कुमार, दीपक दीपांशु, नीरज, कल्पना, खुशबू, गौरव, शिव कुमार, लखविंदर, मनीषा तथा शोधार्थी वेद, राहुल एवं डोल्मा सहित अन्य विद्यार्थियों ने विचारपूर्ण सहभागिता की तथा यह संकल्प व्यक्त किया कि वे अपने अनुभवों को व्यवस्थित रूप में लिपिबद्ध कर शैक्षणिक साहित्य के रूप में विकसित करेंगे।