नई दिल्ली, 07 अप्रैल । मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया है।
मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल सहित केंद्र सरकार के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय लाखों परिवारों के जीवन में नई आशा और सम्मान का संचार करने वाला क्रांतिकारी कदम है।
बैठक में उपस्थित दिल्ली कैबिनेट के सभी मंत्रियों ने एक स्वर में कहा कि वर्षों से उपेक्षा और अनिश्चितता में जीवन यापन कर रहे अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के लिए यह निर्णय किसी उत्सव से कम नहीं है। अब इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को अपने घरों और भविष्य को लेकर जो असुरक्षा और चिंता थी, वह दूर हो जाएगी। यह निर्णय न केवल कानूनी मान्यता देता है, बल्कि इन कॉलोनियों में रहने वाले लाखों नागरिकों को आत्मसम्मान, स्थिरता और विकास की नई राह भी प्रदान करता है।
दिल्ली कैबिनेट का मानना है कि अब केंद्र और दिल्ली सरकार मिलकर इन कॉलोनियों के समग्र और सुनियोजित विकास की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, जिससे यहां रहने वाले लोगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं और जीवन स्तर मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार इन कॉलोनियों को लेकर पहले से ही संवेदनशील है। कॉलोनियों में सुविधाओं के अभाव के कारण इन क्षेत्रों के निवासियों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 800 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है, जिसका उपयोग इन कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए किया जाएगा। अब केंद्र सरकार के ऐतिहासिक निर्णय ने इन कॉलोनियों में विकास और यहां के निवासियों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में कुल 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 कॉलोनियों का नियमितीकरण ‘जैसा है, जहां है’ (As-is Where-is) आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में लेआउट प्लान की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी और सभी भूखंडों और भवनों का उपयोग आवासीय माना जाएगा। लगभग 45 लाख लाभार्थी इस पूरी योजना से लाभान्वित होंगे। नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया अब डीडीए के बजाय सीधे दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को सौंप दी गई है।
नई प्रक्रिया के अनुसार अब आवेदन से लेकर कन्वेयंस डीड जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है, जैसे 7 दिनों में जीआईएस सर्वे रिपोर्ट, 15 दिनों में डिफिशिएंसी रेजोल्यूशन मेमो और 45 दिनों के भीतर कन्वेयंस डीड जारी करना अनिवार्य होगा। साथ ही पीएम-उदय रजिस्टर का नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाएगा और एमसीडी द्वारा नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इस योजना के तहत आवेदन 24 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन स्वागम पोर्टल (https://mcdonline.nic.in/swagam) के माध्यम से प्रारंभ होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग डेढ़ करोड़ की जनसंख्या वाला यह शहर पिछले 20-25 वर्षों में बढ़कर लगभग 3 करोड़ की आबादी तक पहुंच गया है। आज दिल्ली में हजारों अनधिकृत कॉलोनियां, लगभग 675 झुग्गी बस्तियां और 350 से अधिक गांव हैं, जहां लंबे समय तक असंगठित एवं अव्यवस्थित विकास होता रहा। पूर्ववर्ती सरकारों ने इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप आज ऐसी परिस्थितियां बनी हैं कि इन क्षेत्रों को हटाकर पुनर्वास करना भी व्यावहारिक नहीं रह गया है। आज में लिया गया यह निर्णय योजनाबद्ध और व्यवस्थित विकास की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली के शहरी ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा हैं। इनके बिना राजधानी के विकास की परिकल्पना अधूरी है। सरकार का उद्देश्य इन कॉलोनियों को मुख्य धारा के शहरी विकास से जोड़ना है। इन कॉलोनियों में संकरी गलियां, सिंगल-एंट्री मकान और अत्यधिक घनी आबादी होने के कारण आग लगने जैसी आपात स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्य करना अत्यंत कठिन हो जाता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार फायर सर्विसेज के ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि ऐसी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।