फतेहाबाद, 04 अप्रैल । फतेहाबाद जिले के गांव कुम्हारिया में शनिवार को उस समय मातम पसर गया, जब रूस की सेना में भर्ती किए गए 24 वर्षीय युवक अंकित जांगड़ा का पार्थिव शरीर उसके घर पहुंचा। अंकित उन अभागे भारतीय युवाओं में से एक था, जिन्हें ऊंचे सपनों का लालच देकर रूस-यूक्रेन युद्ध की आग में धकेल दिया गया था। शनिवार दोपहर बाद गांव कुम्हारिया के श्मशान घाट में गमगीन माहौल में अंकित का अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही अंकित की डेडबॉडी गांव पहुंची, पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। गांव के हर व्यक्ति के आंख से आंसू नहीं रूक रहे थे। अंकित के भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि उसका भाई सुनहरे भविष्य की तलाश में गत वर्ष 14 फरवरी को स्टडी वीजा पर रूस गया था। फरीदाबाद की एक एजेंट के माध्यम से उसने मॉस्को के एमएसएलयू कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया था। पढ़ाई के साथ-साथ वह एक रेस्टोरेंट में हेल्पर का काम कर अपना खर्च निकाल रहा था। इसी दौरान एक महिला एजेंट ने अंकित, उसके साथी विजय पूनिया और अन्य 13 युवाओं को रूसी सेना में सुरक्षित और मोटे वेतन वाली नौकरी का लालच दिया। उन्हें बताया गया कि 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20-20 लाख रुपये दिए जाएंगे। हर महीने 1.5 से 2 लाख रुपये की सैलरी मिलेगी। इसके बाद उनसे रूसी भाषा के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसे युवा समझ नहीं सके। रघुवीर ने नम आंखों से बताया कि सितंबर 2025 में अंकित की आखिरी वॉट्सऐप कॉल आई थी। तब वह बुरी तरह डरा हुआ था। अंकित ने कहा था, भाई हमें बचा लो, हमारे पास बस एक-दो दिन बचे हैं। हमें यूक्रेन सीमा के पास सोलीडेव के जंगलों में रखा गया है और जल्द ही युद्ध के मैदान में भेज दिया जाएगा। अंकित ने यह भी खुलासा किया था कि उनके कमांडर उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे और उनके बैच के 5 युवकों की पहले ही मौत हो चुकी थी। जब परिजनों ने उस महिला एजेंट से संपर्क किया, तो उसने बेरहमी से कह दिया कि अंकित और विजय मर चुके हैं और अपना नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद अंकित की सुरक्षित वापसी के लिए परिजनों ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। परिवार ने दिल्ली में रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के चक्कर काटे। सिरसा सांसद कुमारी सैलजा और रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर इन युवाओं की जान बचाने की गुहार लगाई थी। तमाम राजनीतिक और कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद, अंकित को जिंदा वापस नहीं लाया जा सका। शुक्रवार को परिवार को उसकी मौत और शव भारत भेजे जाने की सूचना मिली। इसके बाद शनिवार सुबह परिजन दिल्ली पहुंचे और अंकित के शव को गांव में लाकर उसको अंतिम विदाई दी गई। अंकित के साथ गांव का ही एक अन्य युवक विजय पूनिया भी रूस गया था। विजय की वर्तमान स्थिति को लेकर उसके परिजनों की सांसें भी अटकी हुई हैं।