खरगे प्रसंग : तब ऐसी अशिक्षा क्या बुरी है !

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केरल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गुजरात के लोगों को लेकर कहा है कि वहां के लोग ‘अशिक्षित’ हैं, इसलिए वहां के लोगों को पीएम मोदी आसानी से गुमराह कर सकते हैं, लेकिन केरल के लोग ज्यादा समझदार और शिक्षित हैं, इसलिए उन्हें कोई भ्रमित नहीं कर सकता। निश्चित ही यह कहकर खरगे ने न सिर्फ गुजरात के लोगों का, बल्कि उन सभी राज्यों में निवासरत भारतवासियों का अपमान किया है, जहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।

देश में वर्तमान स्थिति के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का भारतीय राजनीति में व्यापक विस्तार है। भाजपा सीधे तौर पर या गठबंधन के माध्यम से देश के 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है। एक तरह से देखें तो उत्तर भारत (हिंदी हृदयस्थल), पश्चिम भारत और उत्तर-पूर्व भारत के अधिकांश हिस्से में भाजपा का सीधा प्रभाव है, जबकि आंध्र प्रदेश और बिहार, महाराष्ट्र, पूवोत्तर के महत्वपूर्ण राज्यों में यह बड़े क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मजबूती से जुड़ी हुई है। यह भी एक तथ्य है कि भाजपा और उसके सहयोगियों वाले राज्य भारत की लगभग 60 फीसद से अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 58 से 62 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उन राज्यों में आता है जहाँ कि आज भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं।

अब इस दिए गए खरगे के बयान के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा है कि “कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी द्वारा गुजरात के लोगों के संदर्भ में दिए गए बयान अत्यंत आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इस प्रकार की टिप्पणी न केवल 6 करोड़ गुजरातवासियों का अपमान है, बल्कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल की पावन धरती की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है।” गुजरात ने हमेशा राष्ट्र निर्माण, विकास और एकता में अग्रणी भूमिका निभाई है और आगे भी करता रहेगा। ऐसे बयान कांग्रेस की संकीर्ण सोच को दर्शाते हैं। यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की विकास की राजनीति और उसे मिल रहे व्यापक जनसमर्थन से कांग्रेस कितना असहज और असुरक्षित महसूस कर रही है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की तरह ही अन्य विरोध के स्वर भी सामने आए हैं, जिन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को सिरे से नकारते हुए इसे अनुचित एवं देश के आमनागरिकों का अपमान बताया है। कभी-कभी लगता है कि पिछले 11 सालों से अधिक समय से केंद्रीय सत्ता से दूर रहने के बाद भी शायद कांग्रेस समझना नहीं चाहती! यदि वास्तव में देश की जनता के मर्म को समझती तो इस तरह के संकुचित और स्वयं से भड़ास केंद्रित बयान कम से कम कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तो नहीं देते। फिर इस बयान के संदर्भ में एक दूसरा दृष्टिकोण भी है, वह यह कि यदि गुजरात के लोग अशिक्षित भी हैं तो क्या बुरा है? वे जीवन का सत्य तो गहराई से पहचानते हैं!

यदि खरगे केरल से गुजरात की तुलना कर भी रहे हैं तो देखें कि दोनों ही राज्य आज कहां खड़े हुए हैं। वस्तुत: भारत के विकास परिदृश्य में केरल और गुजरात दो ऐसे राज्य हैं, जो भिन्न विकास मॉडलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। केरल को जहाँ सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास सूचकांक के लिए जाना जाता है, वहीं गुजरात आर्थिक वृद्धि, औद्योगिकीकरण और निवेश के क्षेत्र में अग्रणी है। तुलनात्मक अध्ययन से ध्यान में आता है कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गुजरात आगे है।

अध्ययन जनसंख्या से आरंभ करते हैं; गुजरात की जनसंख्या लगभग 7.3 से 7.5 करोड़ है, जो केरल की लगभग 3.5 करोड़ जनसंख्या से दोगुनी से अधिक है। सामान्यतः यह अपेक्षा की जाती है कि अधिक जनसंख्या वाले राज्य में संसाधनों पर दबाव अधिक होगा, बेरोजगारी और अपराध जैसी समस्याएँ अधिक होंगी, किंतु वास्तविकता इसके विपरीत दिखाई देती है। गुजरात, अपनी बड़ी जनसंख्या के बावजूद, रोजगार सृजन, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक अवसरों के माध्यम से इन चुनौतियों को नियंत्रित करने में सफल रहा है। इसके विपरीत, केरल में कम जनसंख्या होने के बावजूद बेरोजगारी दर अधिक है।

यहां बेरोजगारी दर 2025-26 में लगभग 7-8 फीसद के आसपास है। इसके विपरीत, गुजरात में बेरोजगारी दर मात्र 2-3 प्रतिशत है, जोकि देश में सबसे कम में से एक है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि केवल शिक्षा दर उच्च होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आर्थिक संरचना और रोजगार सृजन की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण है, जिसमें कि गुजरात आगे है। केरल की साक्षरता दर लगभग 96 फीसद है, जबकि गुजरात की 80-85 फीसद के बीच है, किन्तु इस उपलब्धि के बावजूद, यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि क्या शिक्षा की ये उपलब्धि आर्थिक अवसरों में परिवर्तित हो रही हैं? उच्च शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी इस बात का संकेत देती है कि केरल की सामाजिक प्रगति आर्थिक संरचना से पूरी तरह जुड़ नहीं पाई है।इसके विपरीत, गुजरात ने शिक्षा में अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन के बावजूद आर्थिक अवसरों का विस्तार कर संतुलन स्थापित किया है।

आर्थिक दृष्टि से गुजरात का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली रहा है। 2025-26 में गुजरात का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग ₹29-30 लाख करोड़ के आसपास पहुँच चुका है, जबकि केरल का जीएसडीपी लगभग ₹14-15 लाख करोड़ है। विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में भी गुजरात लगातार शीर्ष राज्यों में बना हुआ है। 2025 तक यह राज्य अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित कर चुका है। गुजरात की सबसे बड़ी ताकत उसका औद्योगिक आधार है। पेट्रोकेमिकल, फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और बंदरगाह आधारित उद्योगों ने इसे भारत का औद्योगिक केंद्र बना दिया है। कहना होगा कि किसी भी राज्य में उसकी समग्र सफलता के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए औद्योगिक आधार अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में गुजरात की बढ़त निर्णायक है।

प्रति व्यक्ति आय के स्तर पर दोनों राज्य लगभग समान दिखाई देते हैं, किंतु वृद्धि दर और औद्योगिक योगदान के मामले में गुजरात आगे है। गुजरात की अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान 50 फीसद से अधिक है, जबकि केरल में सेवा क्षेत्र प्रमुख है। यहां के लोग अधिकांश राज्य से बाहर जाकर धन अर्जित करते हैं, जबकि गुजराती अपने लिए तो धनार्जन करते ही हैं,वह दूसरों को भी बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है जो आज गुजरात भारत के कुल निर्यात का लगभग 25-27 प्रतिशत योगदान देता है। इस प्रकार, आर्थिक विस्तार और उत्पादन क्षमता के मामले में गुजरात स्पष्ट रूप से केरल से बहुत आगे है।

एक और महत्वपूर्ण पहलू अपराध दर है। केरल में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध दर अधिक दर्ज की गई है, जबकि गुजरात में यह अपेक्षाकृत कम है। गुजरात में अपेक्षाकृत कम अपराध दर आज यह दर्शाती है कि आर्थिक अवसर और रोजगार सामाजिक स्थिरता में योगदान देते हैं। वहीं, गुजरात ने सड़क, बिजली, बंदरगाह और औद्योगिक कॉरिडोर के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है। यह राज्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” में लगातार शीर्ष पर रहा है, जिससे निवेश आकर्षित हुआ है। केरल में स्वास्थ्य और शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत है, लेकिन भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक सुविधाओं में अपेक्षाकृत कमी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक विकास के लिए भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर अत्यंत आवश्यक है, जिसमें गुजरात आगे है।

आज गुजरात में राजस्व अधिशेष और नियंत्रित ऋण स्तर देखने को मिलता है। इसके विपरीत, केरल उच्च राजस्व घाटे और बढ़ते ऋण से जूझ रहा है। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि अधिक जनसंख्या और संसाधन दबाव के बावजूद गुजरात ने बेरोजगारी, अपराध और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके बाद भी आश्चर्य होता है कि देश में लम्बे समय तक शासन में रही पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष गुजरात की सफलता को नकारता है, वहां के लोगों को अशिक्षित कहता है!निश्चित तौर पर यह कांग्रेस की छोटी सोच को दर्शाने वाला बयान है, जिसकी जितनी भी आलोचना होगी वह कम ही है।