( अपडेट) उद्याेगपति अडाणी ने परिवार संग किए श्रीरामलला के दर्शन, गुरुकुल महाविद्यालय में एआई-इनेबल्ड लैब शुरू करने का रखा प्रस्ताव

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अयोध्या, 02 अप्रैल। देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में परिवार के साथ श्रीरामलला के दर्शन पूजन किया। अडाणी ने निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित भी किया और गुरुकुल की पुरानी और आधुनिक परंपरा के बारे में जाना समझा। अडाणी ने गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हरसंभव सहयोग देने और गुरुकुल में पारंपरिक शिक्षा को सीखने के नए मौकों के साथ जोड़ने के लिएएआई-इनेबल्ड लैब शुरू करने का प्रस्ताव रखा।

गुरुवार को अहमदाबाद से दाे चार्टर्ड फ्लाइट्स से उद्योगपति और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी अपने परिजनाें के साथ महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। गौतम अडाणी अपनी पत्नी डॉ. प्रीति अडाणी, बड़ा बेटे करण अडाणी और बहू परिधि अडाणी के साथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय, ट्रस्ट सदस्य डॉ अनिल मिश्र, विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय पदाधिकारी राजेन्द्र सिंह पंकज, गोपाल नागरकट्टे आदि ने मंदिर में उनका स्वागत किया गया। इसके बाद अडाणी ने परिजनाें के साथ श्रीरामलला के दर्शन किये और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद आरती भी की। मंदिर पुजारी ने उन्हें तिलक लगाया। इसके बाद उन्हाेंने प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद मंदिर का भ्रमण कर अडाणी ने राम मंदिर निर्माण के बारे में ट्रस्ट के सदस्यों से जानकारी ली। अडाणी श्री राम मंदिर परिसर में 30 मिनट तक रहेI गौतम अडाणी ने हनुमान जयंती के दिन पर श्रीराम यन्त्र का भी दर्शन किया। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने गौतम अडाणी, करन अडाणी आदि को श्रीराम मन्दिर के लिए चले लंबे संघर्ष, आंदोलन, कानूनी प्रक्रिया और निर्माण संबंधी जानकारी दी। आगंतुकों ने जिज्ञासा पूर्वक मन्दिर की भव्यता का अवलोकन किया।

यहां गाैतम अडाणी ने कहा कि मुझे और मेरे परिवार को अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह एक भावुक और गर्व का पल है। यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भगवान राम के आदर्श हमें सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान राम का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे और हमारा देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे। गौतम अडानी ने श्रीरामलला के दर्शन को “बहुत ज़्यादा इमोशन और गर्व” वाला बताते हुए कहा कि उनके लिए मंदिर सिर्फ़ एक धार्मिक जगह से कहीं ज़्यादा है। यह मंदिर भारत की कल्चरल कंटिन्यूटी, एकता और बढ़ते आत्म विश्वास का प्रतीक है। साथ ही भगवान राम के आदर्शों, ईमानदारी, कर्तव्य और सेवा को देश की आगे की यात्रा के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर बताया।

गौतम अडाणी ने कहा कि भारत के इतिहास, भाषाओं, सोच और सांस्कृतिक विरासत के साथ गहरे जुड़ाव को बढ़ावा देने वाली पहलों के ज़रिए इंडोलॉजी की पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग के बना रहेगा।

एआई-इनेबल्ड लैब के ज़रिए गुरुकुल इकोसिस्टम को सपोर्ट करने का दिया आश्वासन

इसके बाद उद्याेगपति अडाणी श्री राम मंदिर से लगभग 10 मिनट की दूरी पर स्थित श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे। यह महाविद्यालय 1935 में स्वामी त्यागानंदजी ने स्थापित किया था। यह आर्य समाज के सिद्धांतों पर आधारित वैदिक शिक्षा, सामाजिक उत्थान और आसान शिक्षा पर एक सुधारवादी आंदोलन की तरह चल रहा है। यहां आवासीय परिसर में शिक्षक, शिक्षार्थी और मार्गदर्शक रहते और पढ़ते हैं। महाविद्यालय में अडाणी ने गुरुकुल के विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ बातचीत की। अडाणी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश एआई-ड्रिवन भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, फिर भी भारत के ज्ञान सिस्टम को बचाकर रखना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अडानी ग्रुप की सोशल वेलफेयर और डेवलपमेंट ब्रांच, अडाणी फाउंडेशन एआई-इनेबल्ड लैब के ज़रिए परंपरा और टेक्नोलॉजी को मिलाकर गुरुकुल इकोसिस्टम को सपोर्ट करेगी। अडाणी ने निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय में बच्चों व शिक्षकों के बीच बैठ कर श्लोक सुने और गौशाला भी देखी। उन्होंने गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हरसंभव सहयोग देने का भीआश्वासन दिया।

उल्लेखनीय है कि यह गुरुकुल लगभग 200 विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा देता है। गुरुकुल परिसर में ही पारंपरिक गायों के घर की तरह एक गौशाला है। गुरुकुल और गौशाला से सीखने के माहौल में सांस्कृतिक, इकोलॉजिकल और ग्रामीण तरीकों के मेल को दिखाता है। यही इस संस्था की एक समृद्ध विरासत है। श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के शुरुआती दिनों में यहां के आगंतुकों की सूची में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम के नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी शामिल हैं।