तेहरान/बेरूत, 11 मार्च । पश्चिम एशिया में 12 दिनाें से जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अब वह केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों के खिलाफ लगातार हमले करेगा। इस कारण वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है और तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ईरान ने मध्य पूर्व में माैजूद अमेरिकी और इजराइली बैंकों के साथ-साथ कई अमेरिकी टेक कंपनियां काे भी निशाना बनाने की बात कही हैै।
लेबनान की लेबनानी ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन इंटरनेशनल (एलबीसीआई) और ईरान की स्थानीय समाचार एजेंसी ने ईरान की राजधानी तेहरान स्थित खातम अल-अनबिया सैन्य कमांन मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़कारी ने बुधवार को कहा कि हालिया हमलों के बाद ईरान अब केवल “जवाबी कार्रवाई” तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपने दुश्मनों के खिलाफ लगातार हमले करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका तेल की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर पाएगा और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़कारी ने कहा कि हम अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों तक तेल की एक भी बूंद नहीं पहुंचने देंगे। उनसे जुड़े किसी भी जहाज़ या टैंकर को वैध टारगेट माना जाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होगा। तेल का बैरल 200 डॉलर पर पहुंचने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि तेल की कीमत उस क्षेत्रीय सुरक्षा पर निर्भर करती है जिसे आपने अस्थिर कर दिया है।
दूसरी ओर ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजराइली बैंकों के साथ-साथ कई अमेरिकी टेक कंपनियां भी संभावित निशाने पर हो सकती हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, पैलंटिर, आईबीएम, एनवीडिया और ओरेकल जैसी कंपनियों के दफ्तर और एसेट्स को टारगेट किया जा सकता है।
इन कंपनियों की क्षेत्रीय मौजूदगी इजराइल के अलावा खाड़ी के प्रमुख शहरों दुबई और अबू धाबी में भी बताई जाती है। वहीं, ईरान समर्थक आउटलेट्स ने उन स्थानों की सूची जारी करने का दावा किया है जहां इन कंपनियों के कार्यालय या अन्य संसाधन मौजूद हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सूची में मध्य पूर्व में काम कर रही बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों के कई ऑफिस और आधारभूत संरचना शामिल हैं। यह भी कहा गया है कि क्षेत्रीय संघर्ष अब धीरे-धीरे इंफ्रास्ट्रक्चर की लड़ाई में बदलता जा रहा है, जिसके साथ ईरान के संभावित टारगेट का दायरा बढ़ता जा रहा है। ———–