सहरसा स्टेडियम को तीरंदाजी स्टेडियम बनाने के पर खेल संघ ने जताई आपत्ति

Share

सहरसा, 20 मार्च । पिछले वर्ष प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा सहरसा में बेहतर खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करने की दिशा में पहल किया गया था, जिसके तहत स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने की बात की गई थी।स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए जगह नहीं मिलने पर तत्कालीन जिला पदाधिकारी द्वारा सहरसा स्टेडियम को खेल के लिए बेहतर और आकर्षक बनाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत सहरसा स्टेडियम में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक एवं फुटबॉल का मैदान ,मल्टीपरपज हॉल प्रशासनिक भवन, एवं बास्केटबाल वालीबाल एवं लॉन्ग टेनिस के कोर्ट बनाने की प्रक्रिया प्रारंभिक की गई, जिसका निविदा भी निकल गया और उसके उपरांत जनवरी माह में संवेदक द्वारा कार्य प्रारंभ भी कर दिया गया लेकिन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा पुनः कार्य को रोकते हुए इस स्टेडियम को तीरंदाजी स्टेडियम के रूप में विकसित करने का कार्य किया जा रहा है,जिस पर विभिन्न खेल संघ के अध्यक्ष व सचिवों ने आपत्ति जताई है और जिला पदाधिकारी से आग्रह किया है कि जिस तरह पूर्व में एथलेटिक्स और फुटबॉल का मैदान बनाया जा रहा था वही बनाया जाए और स्टेडियम के पूर्वी दिशा में अतिक्रमण को अति शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

इस अवसर पर जिला हॉकी संघ अध्यक्ष सुनील कुमार झा, क्रीड़ा भारती के प्रांतीय अध्यक्ष चंद्रशेखर अधिकारी,जिला बाल बैडमिंटन संघ के सचिव अंशु मिश्रा,जिला कबड्डी संघ के सचिव आशीष सिंह, जिला रस्सा कसी संघ के सचिव विप्लव रंजन,जिला साइकलिंग संघ के सचिव दर्शन कुमार गुड्डू,जिला योग संघ के सचिव अमन कुमार सिंह एवं जिला खेल संघ के सचिव सह जिला एथलेटिक्स एवं वॉलीबॉल संघ के सचिव रोशन सिंह धोनी ने कहा कि सहरसा सहित कोसी में तीरंदाजी का कोई इतिहास नहीं रहा है और प्रमंडल मुख्यालय होने के बावजूद भी यहां 30 वर्षों से सहरसा प्रमंडल मुख्यालय स्टेडियम को तरस रहा है।

ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री द्वारा एक प्रयास स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के रूप में सहरसा स्टेडियम को डेवलप करने की बात कही गई जो फलीभूत होता भी दिख रहा है लेकिन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा सहरसा स्टेडियम सहरसा को तीरंदाजी का स्टेडियम बनाना यह काफी अचंभित करने वाला बात है। सहरसा से लगातार एथलेटिक्स और फुटबॉल के बच्चे राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शिरकत कर रहे हैं और अब राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेडल भी ला रहे हैं। एथलेटिक्स और फुटबॉल से कई खिलाड़ियों ने बिहार सरकार में मेडल लो नौकरी पाओ की नीति पर भी अपना कदम बढ़ाया है। लगभग 3000 एथलीट जिला एथलेटिक संघ से निबंधित है।