अब सड़क निमार्ण में हाेगा श्रेेडेड प्लास्टिक का उपयोग, सिंगल यूज प्लास्टिक पर लगेगी राेक

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मंडी, 31 मार्च । हिमाचल प्रदेश की सड़कों के निर्माण में अब श्रेेडेड प्लास्टिक का उपयोग होगा। वहीं पर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से रोक लगेगी। प्रदेश के पर्यावरण से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा। इस बारे में उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में एनजीटी से संबंधित विभिन्न मामलों तथा सिंगल यूज प्लास्टिक उन्मूलन को लेकर जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) पर रोक को कड़ाई से लागू किया जाए तथा नियमों की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए गए निरीक्षण, चालान, प्लास्टिक जब्ती तथा प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजारों, संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जाएं तथा प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री के उपयोग पर पूर्ण रोक सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को प्राथमिकता देते हुए इसे सड़क निर्माण, सीमेंट संयंत्रों तथा अन्य स्वीकृत माध्यमों के माध्यम से उपयोग में लाने के निर्देश दिए।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि तरल एवं ठोस कचरे का उचित निस्तारण सुनिश्चित करना नगर निकायों की जिम्मेदारी है तथा इस कार्य में संलग्न सभी डिस्लजर एवं ठेकेदारों का नगर निकायों तथा खंड (ब्लॉक) कार्यालयों में पंजीकरण अनिवार्य होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि सेप्टिक टैंक से निकाले गए मल को केवल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ही डंप किया जाए तथा इसे खुले में, नालों अथवा खड्डों में बहाने की किसी भी घटना पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने उपमंडल अधिकारियों एसडीएम एवं खंड विकास अधिकारियों बीडीओ को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल शक्ति विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित करें कि सेप्टिक टैंक से निकाले गए मल का निस्तारण केवल अधिकृत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अथवा यांत्रिक डिस्लजर के माध्यम से ही किया जाए। उन्होंने कहा कि गोहर जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए तथा वर्षा के दौरान सेप्टिक टैंक खाली कर मल को खड्डों में बहाने की शिकायतों पर सख्ती से रोक लगाई जाए। उपायुक्त ने बताया कि जिले में 426 गांवों की मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित स्लज निस्तारण हेतु सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से जोड़ा गया है। इनमें जोगिंद्रनगर के मझारनू, मंडी के रघुनाथ का पधर तथा सुंदरनगर के चांदपुर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं।