नई दिल्ली, 27 मार्च । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा समेत चार आरोपितों और एक कंपनी को बरी करने का आदेश दिया है। स्पेशल जज सुनयना शर्मा ने यह आदेश दिया।
कोर्ट ने एचसी गुप्ता, विजय दर्डा के साथ ही उनके पुत्र देवेंद्र दर्दा, एएमआर आयरन एंड स्टील प्रा.लि. के पूर्व डायरेक्टर मनोज कुमार जायसवाल और एएमआर कंपनी को बरी करने का आदेश दिया। ये मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के प्रथम कार्यकाल के दौरान 2006 से 2009 के बीच का है। आरोप था कि एएमआर आयरन एंड स्टील प्रा.लि. ने एचसी गुप्ता के साथ साजिश रचकर फर्जी सूचनाओं के आधार पर कोयला मंत्रालय में कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए आवेदन किया। आरोप है कि तत्कालीन राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर इस कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए सिफारिश की थी। उस समय कोयला मंत्रालय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था।
इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की दारा 13(2) और 13(1)(डी) के तहत 2012 में एफआईआर दर्ज किया था। सीबीआई ने इस मामले में 27 मार्च 2014 को चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में सीबीआई ने 37 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। कोर्ट ने सभी आरोपितों को बरी करते हुए कहा कि सीबीआई आराेप काे साबित करने में नाकाम रही। कोर्ट ने कहा कि 24 करोड़ 60 लाख रुपये के लेन-देन का इस आरोप से कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस बात के कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं हैं कि विजय दर्डा की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र से कोयला आवंटन पर कोई प्रभाव पड़ा।