जयपुर, 20 मार्च । राजस्थान उच्च न्यायालय ने साल 2011 में बैंक की परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाकर नौकरी हासिल करने वाले अभियुक्त को निचली अदालत की ओर से मिली सजा को स्थगित कर दिया है। जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की एकलपीठ ने यह आदेश अभियुक्त अजीत कुमार की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विकास सोमानी ने अदालत को बताया कि निचली अदालत और अपीलीय कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य का विश्लेषण किए बिना ही उसे दंडित किया है। वहीं हाईकोर्ट में पेश याचिका के निस्तारण में लंबा समय लगेगा। ऐसे में याचिकाकर्ता को मिली सजा को स्थगित किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को मिली सजा को स्थगित कर दिया है।
गौरतलब है कि सीबीआई ने साल 2014 में रिपोर्ट दर्ज की थी। जिसमें कहा गया कि अजीत कुमार ने बैंक की परीक्षा के लिए साल 2011 में आवेदन किया था। भर्ती की लिखित परीक्षा में अजीत ने अपने स्थान पर डमी कैंडिडेट के रूप में मुकेश कुमार को बैठाया और लिखित परीक्षा में उसका साक्षात्कार के लिए चयन हो गया। वहीं जून, 2011 में अजीत साक्षात्कार में शामिल हुआ और उसे पास कर दिया। इस परिणाम के आधार पर जनवरी, 2012 में उसने एसबीबीजे, देवली में पदभार ग्रहण कर लिया। रिपोर्ट पर अनुसंधान के बाद सीबीआई ने विशेष न्यायालय में दोनों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। जिस पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत ने मुकेश कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, लेकिन अजीत कुमार को तीन साल की सजा और जुर्माने से दंडित किया। इस आदेश के खिलाफ पेश अपील को भी एडीजे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इन दोनों आदेशों को उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर चुनौती दी गई।