आपराधिक मामलों की मेडिकल रिपोर्ट में अनुमानित और सशर्त भाषा का उपयोग ना करें मेडिकल ज्यूरिस्ट-हाईकोर्ट

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जयपुर, 07 मार्च । राजस्थान उच्‍च न्‍यायालय ने कहा है कि आपराधिक मामलों में मेडिकल ज्यूरिस्ट की ओर से दी जाने वाली मेडिकल रिपोर्ट खतरनाक हो सकती है या जीवन के लिए घातक हो सकती हैं, जैसे अनुमानित और सशर्त भाषा से बचना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव, डीजीपी और गृह विभाग को भेजते हुए कहा है कि आपराधिक मामलों में दी जाने वाली मेडिको-लीगल के स्पष्ट, पूर्ण और चिकित्सीय तथ्यों से पूर्ण होने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाए। जस्टिस चन्द्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने यह आदेश गौतम की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।

जमानत याचिका में अधिवक्ता स्वप्निल सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ करौली के महावीरजी थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एफआईआर के अनुसार उसने अमर सिंह के सिर पर फावडेे चोट पहुंचाई। वहीं पीडित व अन्य गवाहों ने अपने बयानों में लाठी से चोट लगना बताया। वहीं मेडिको-लीगल रिपोर्ट में माना गया कि चोट गंभीर किस्म की है और समय पर चिकित्सा उपचार नहीं मिलने पर मौत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। याचिका में कहा गया कि यह रिपोर्ट अस्पष्ट है, क्योंकि किसी भी चोट को समय पर उपचार नहीं मिले तो वह मौत का कारण बन सकती है। ऐसे में उसे जमानत दी जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में चोट को प्राणघातक बताया गया है। ऐसे में जमानत याचिका को खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार को दिशा-निर्देश जारी करते हुए याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने को कहा है।