नेपाल में जेन जी प्रदर्शन के दौरान जलाए गए सरकारी भवनों का नहीं हो पाया पुनर्निर्माण

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काठमांडू, 24 मार्च । नेपाल में पिछले साल ८ और 9 सितंबर को हुए जेन जी आंदोलन के दौरान आगजनी से क्षतिग्रस्त सरकारी भवनों का पुनर्निर्माण अभी भी शुरू नहीं हो पाया है। सभी बड़े तथा महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की अवस्था जर्जर है और वो उपयोग के भी लायक नहीं है।

देश के प्रमुख प्रशासनिक भवन सिंहदरबार में प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर लगभग सभी मंत्रालय का भवन हैं। यहां सभी जले हुए ढांचे अब भी मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं। इसी तरह प्रधान मंत्री आवास, राष्ट्रपति भवन शीतल निवास, सर्वोच्च अदालत जैसी प्रमुख संरचनाएं भी हैं। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र को अब संसद भवन के रूप में उपयोग किया जा रहा है, लेकिन वह अभी भी आग के काले धब्बों के साथ खड़ा है। इसकी मामूली मरम्मत और रंगाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब छवि बनने से बचा जा सकता था, लेकिन सरकार ने इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

संसद भवन परियोजना में निर्माणाधीन नया संसद भवन सांसदों के शपथ ग्रहण से पहले पूरा नहीं हो सका। इसलिए 26 मार्च को सांसदों को अस्थायी हॉल में शपथ दिलाई जा रही है। संघीय संसद सचिवालय के प्रवक्ता एकराम गिरी के अनुसार नए भवन में संसद हॉल का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, इसलिए बहुउद्देश्यीय हॉल में शपथ दिलाई जाएगी। इस भवन की नींव 19 सितंबर, 2019 को रखी गई थी। छह साल बाद भी लगभग 90–92 फीसदी ही पूरा हो पाया है। इसमें केंद्रीय लॉबी, राष्ट्रीय सभा कक्ष, प्रतिनिधि सभा कक्ष, वीवीआईपी कक्ष और प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के कार्यालय शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट और काठमांडू जिला अदालत सहित कई सरकारी भवन अभी भी आग से हुए नुकसान के निशान झेल रहे हैं। आंदोलन के छह महीने बाद भी इनका पुनर्निर्माण न होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक संदेश दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 629 भवन पूरी तरह नष्ट हुए, 560 से अधिक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इनमें 310 सरकारी कार्यालय पूरी तरह ध्वस्त हुए। भौतिक पूर्वाधार मंत्रालय ने अब तक पुनर्निर्माण पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। मंत्रालय के सूचना अधिकारी ज्ञानराज लम्साल ने पुष्टि की कि सरकार से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है।

शहरी विकास विभाग के अनुसार 166 हल्के क्षतिग्रस्त भवनों में से 54 उपयोग में आ चुके हैं, 34 की मरम्मत जारी है, 100 आंशिक क्षतिग्रस्त भवनों में से 56 के ठेके जारी हुए, जबकि 28 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त भवनों को पूरी तरह पुनर्निर्माण की जरूरत है। पुलिस के 177 भवन पूरी तरह अनुपयोगी हो गए थे, जबकि 258 मरम्मत योग्य थे। अधिकांश को पुनर्निर्माण के बाद फिर से चालू किया जा चुका है। इसी तरह राजनीतिक दलों के 45 कार्यालय पूरी तरह नष्ट हुए जबकि 174 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।