धर्मशाला, 17 मार्च । हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केन्द्र मोहली, धर्मशाला में ‘आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियां’ विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न हो गई। संगोष्ठी के अंतिम दिन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. बाल कृष्ण शिवराम, अधिष्ठाता अध्ययन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला मुख्यातिथि जबकि मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. नैनजीत सिंह नेगी, निदेशक, ‘आपदा प्रबंधन तथा जोखिम न्यूनीकरण हिमालयी शोध केंद्र’ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में तिब्बत समुदाय से डॉ. लोबसंग येंग्सो, वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने मुख्यातिथि सहित मुख्य वक्ता और सभी वरिष्ठ अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता प्रो. नैनजीत सिंह नेगी ने पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा से सम्बंधित महत्वपूर्ण बिंदु सांझा किए। केंद्र निदेशक ने विश्वविद्यालय में स्थापित शोध केंद्र के माध्यम से प्रस्तावित शोध योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए इससे निपटने हेतु सामाजिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. लोबसंग येंग्सो ने विशेष रूप से तिब्बत में घट रही आपदा सम्बन्धी घटनाओं के विभिन्न कारणों को डिजिटल प्रस्तुतिकरण के माध्यम से चित्रित किया।
वहीं संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में विकास पर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन इसके लिए पहाड़ों में सड़क निर्माण, सुरंग निर्माण तथा विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण कार्य जोरों पर है, जिसके लिए पहाड़ों का अत्यधिक कटान भी आपदा का प्रमुख कारण है। उन्होंने इस क्षेत्र में स्थापित विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के आपसी तालमेल की कमी को भी मुख्य समस्या मानाI उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी तथा ग्रामीण क्षेत्र है, जहां पर अभी भी सड़कों की कमी है। उन्होंने इस केंद्र में अगले सत्रों से नए पाठ्यक्रम शुरू करने की बात कही। मुख्यातिथि ने सभी प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को सहभागिता के प्रमाणपत्र भेंट इस सम्मानित भी किया। इस अवसर पर अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों के अतिरिक्त लगभग 160 विद्यार्थियों ने भाग लिया।