नई दिल्ली, 19 मार्च । स्टील सेक्टर में काम करने वाली कंपनी राजपूताना स्टेनलेस लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में फ्लैट एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 122 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज एनएसई पर इसकी लिस्टिंग बिना किसी उतार-चढ़ाव के 122 रुपये के स्तर पर ही हुई। हालांकि, बीएसई पर कंपनी के शेयर 1.95 रुपये के मामूली प्रीमियम के साथ 123.95 रुपये के स्तर पर लिस्ट हुए। लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण इस शेयर के भाव में और गिरावट आ गई।
बिकवाली के दबाव में ये शेयर बीएसई पर 111.25 रुपये के स्तर तक और एनएसई पर 111.16 रुपये के स्तर तक गिर गया। हालांकि बाद में इसके स्तर में मामूली सुधार हुआ, जिसके कारण कंपनी के शेयर बीएसई पर 112.90 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर 113.03 रुपये के स्तर पर बंद हुए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को लगभग 7.40 प्रतिशत का नुकसान हो गया।
राजपूताना स्टेनलेस लिमिटेड का 254.98 करोड़ रुपये का आईपीओ 9 से 11 मार्चे के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.12 गुना सब्सक्राइब हो सका था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 2.51 गुना (एक्स एंकर) सब्सक्राइब हुआ था। नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 2.59 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। रिटेल इन्वेस्टर्स ने इस आईपीओ के प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाया, जिसके कारण इस श्रेणी के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 0.27 गुना ही सब्सक्राइब हो सका था।
इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 2.09 करोड़ शेयर जारी किए गए हैं। इनमें 179 करोड़ रुपये के 1,46,50,000 नए शेयर और 75.98 करोड़ रुपये के 62,50,000 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने, स्टेनलेस स्टील सीमलेस पाइप्स की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का सेटअप करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 24.04 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 31.63 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 39.85 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी को 24.41 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में मामूली उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 950.69 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में कम होकर 915.50 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 937.49 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी को 502.77 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
इस अवधि में कंपनी के कर्ज में भी उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 79.83 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में घट कर 79.76 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 99.75 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2025 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 85.91 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।
इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 46.73 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 78.36 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 83.75 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 108.16 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 43.85 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 59.41 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए उछल कर 73.79 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 45.92 करोड़ रुपये के स्तर पर था।