जोधपुर, 06 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग सगी बेटी से रेप के मामले में आरोपित पिता को आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। वह डेढ़ साल से बेटी से रेप कर रहा था। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि यह केवल एक दोषी की अपील को खारिज करना नहीं है। यह समाज की नैतिक चेतना और बाल गरिमा की रक्षा का प्रश्न है।
कोर्ट ने राजस्थान सरकार को पीड़िता को 7 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 13 अक्टूबर 2023 के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए आरोपित पिता को दोषी माना। दरअसल, मां के दूसरी जगह चले जाने के बाद पीड़िता पिता के साथ अकेली रहती थी। पिता इसी का फायदा उठाकर डेढ़ साल तक रेप करता रहा। पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान पीड़िता ने अपनी आपबीती चचेरी बहन को बताई। चचेरी बहन की सलाह पर पीड़िता ने सबूत जुटाने की ठानी। पिता ने दोबारा घिनौनी हरकत की तो मोबाइल को खिडक़ी के पास छिपाकर वीडियो बना लिया। इस वीडियो को बहन और चचेरे भाई को भेजने के बाद 27 मार्च 2023 को एफआईआर दर्ज कराई गई। पिता के वकील ने हाईकोर्ट में दावा किया कि आरोपित पिता शारीरिक रूप से संबंध बनाने में अक्षम है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि पीड़िता के चचेरे भाई ने आटा-साटा प्रथा के तहत जल्दी शादी करवाने के लालच में यह झूठी साजिश रची है। वकील ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक सबूत (वीडियो) की प्रामाणिकता जांचने के लिए कोई एफएसएल रिपोर्ट नहीं होने के कारण उसे वैध सबूत नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए वीडियो साक्ष्य को प्रामाणिक माना और पिता के कृत्य पर बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने फैसले में लिखा- आरोपित पीड़िता का जैविक पिता था। वही व्यक्ति जिसे कानून और प्रकृति द्वारा उसकी शारीरिक और भावनात्मक भलाई की रक्षा, पोषण और सुरक्षा करने का कर्तव्य सौंपा गया था। उस पवित्र दायित्व का निर्वहन करने के बजाय, उसने अपनी नाबालिग बेटी की मासूमियत का शोषण करने के लिए अपने अधिकार और प्रभुत्व की स्थिति का दुरुपयोग किया। इस तरह का आचरण एक पिता और बेटी के बीच सबसे पवित्र और प्राकृतिक रिश्ते का पूर्ण और निंदनीय विश्वासघात है।