जयपुर, 09 मार्च । साधना के प्रतीक चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से होगा। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले इस नौ दिवसीय पर्व में श्रद्धालु मां भगवती की साधना और उपासना में लीन रहेंगे। घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ होगी। नवरात्र के प्रथम दिन मां भगवती का आगमन पालकी पर होगा तथा प्रस्थान भी पालकी पर ही होगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की वृद्धि का संकेत मिल रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि 19 मार्च को सूर्योदय सुबह 6:06 बजे होगा। अमावस्या तिथि सुबह 6:40 बजे तक रहेगी, जबकि प्रतिपदा तिथि का प्रभाव पूरे दिन रहेगा। इस कारण 19 मार्च को ही नवरात्र व्रत का शुभारंभ और कलश स्थापना का विधान है। उन्होंने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग के अभाव के कारण दोपहर 12:30 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं नवरात्र के दौरान हवन-पूजन और व्रत की पूर्णाहुति 27 मार्च को दोपहर 12:27 बजे तक की जा सकेगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महा अष्टमी का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा, जिसका पारण 27 मार्च को होगा। महानवमी का व्रत 27 मार्च को रहेगा तथा पारण 28 मार्च को प्रातः: 10:34 बजे तक किया जा सकेगा। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्र के अवसर पर विभिन्न मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।