रायपुर, 07 मार्च । प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, घने वन, झरनों की कलकल ध्वनि और ऐतिहासिक धरोहरों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। वर्ष 2025 के दौरान कुल 820 विदेशी पर्यटकों ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की, जो यह संकेत देता है कि राज्य की अनछुई प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
छत्तीसगढ़ को “पर्यटकों का स्वर्ग” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे भव्य जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, सिरपुर और रतनपुर जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल, बस्तर की अद्वितीय जनजातीय परंपराएँ और लोकनृत्य, सरगुजा के पर्वतीय क्षेत्र तथा जशपुर की शांत और हरित वादियाँ विदेशी सैलानियों को एक अलग अनुभव प्रदान करती हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ उन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है, जो प्रकृति के करीब रहकर स्थानीय संस्कृति को समझना चाहते हैं।
राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना, होटल और होम-स्टे सुविधाओं का विस्तार, पर्यटक मार्गदर्शकों का प्रशिक्षण, डिजिटल प्रचार-प्रसार तथा बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे प्रयासों से पर्यटकों को अधिक सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही राज्य में ग्रामीण पर्यटन, ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
बस्तर क्षेत्र विदेशी सैलानियों के लिए अत्यंत संभावनाशील पर्यटन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। यहाँ के प्राकृतिक जलप्रपात, घने वन, राष्ट्रीय उद्यान, आदिवासी जीवन शैली और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसे सांस्कृतिक आयोजन विश्वभर के पर्यटकों के लिए अनूठा अनुभव प्रस्तुत करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता, चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता और तीरथगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता बस्तर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान देते हैं। चित्रकोट फॉल्स के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी प्रस्तावित है। चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर की प्रकृति और संस्कृति गंतव्य के रूप में पुनर्विकसित करना है। राज्य सरकार की इन योजनाओं से बस्तर आने वाले वर्षों में विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र होगा।
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर एवं हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक किर्सी ह्यवैरिनेन की बस्तर की छह दिवसीय यात्रा ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दिलाई है। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय समुदायों की जीवन शैली की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव बताया। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ और सकारात्मक अनुभव विदेशों में छत्तीसगढ़ की छवि को और मजबूत करेंगे तथा भविष्य में अधिक विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने में सहायक होंगे।
शासन ने बताया है कि सरगुजा और जशपुर क्षेत्र भी विदेशी सैलानियों के लिए अपार संभावनाएँ समेटे हुए हैं। सरगुजा के पर्वतीय वन क्षेत्र, मैनपाट का शांत और मनोहारी वातावरण, जशपुर की हरित घाटियाँ तथा वहाँ की प्राकृतिक जैव विविधता प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाएँ भी तेजी से विकसित हो रही हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों के लिए नए अनुभवों के द्वार खुल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार, पर्यटन मेलों में भागीदारी, डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से प्रचार तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास जैसे कई कदम उठा रही है। साथ ही, स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सवों को पर्यटन से जोड़कर छत्तीसगढ़ को एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।