युवाओं के आगे बढ़ने से ‘विकसित भारत’ का विजन हकीकत बनता है : विजेंद्र गुप्ता

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नई दिल्ली, 11 फ़रवरी । दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जब युवा नागरिक लोकतंत्र की जीवंत संस्थाओं के साथ जुड़ते हैं, तो वे न केवल इतिहास सीखते हैं बल्कि राष्ट्र की निरंतर संवैधानिक यात्रा का हिस्सा भी बनते हैं। ये विचार विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को ‘माय भारत केंद्र’ द्वारा गृह मंत्रालय के समन्वय से आयोजित 17वें जनजातीय युवा विनिमय कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ संवाद के दौरान व्यक्त किए।

इस अवसर पर ‘माय भारत’ के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस संवाद कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ (बस्तर, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और मोहला-मानपुर), झारखंड (पश्चिमी सिंहभूम), मध्य प्रदेश (बालाघाट), ओडिशा (कंधमाल और कालाहांडी) और महाराष्ट्र (गढ़चिरौली) जैसे जिलों के लगभग 200 जनजातीय युवाओं ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल के साथ 36 जिला युवा अधिकारी और कार्यक्रम से जुड़े अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।

विजेंद्र गुप्ता ने उन 36 युवा अधिकारियों की प्रेरक यात्रा की सराहना की, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की लेकिन अंतिम सूची में स्थान नहीं बना पाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा उन प्रतिबद्ध युवाओं के लिए हमेशा एक गरिमामयी मार्ग है जो देश की सेवा का जज्बा रखते हैं।

‘विकसित भारत’ के विजन में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय विकास की नींव संवैधानिक जागरूकता, सामाजिक एकजुटता और सूचित भागीदारी पर टिकी होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के भ्रमण से प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शासन, सार्वजनिक सेवा और सामुदायिक नेतृत्व में सार्थक योगदान देने की प्रेरणा मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विधानसभा सदन का गाइडेड टूर भी कराया गया, जहां उन्हें इस सदन की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और एक संवैधानिक संस्था के रूप में इसके विकास से अवगत कराया गया।

इस अवसर पर विट्ठलभाई पटेल के संवैधानिक योगदान और विधायी स्वतंत्रता को सुदृढ़ करने में उनकी भूमिका पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री “श्री विट्ठलभाई की गौरव गाथा” दिखाई गई। विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी कि दिल्ली विधानसभा ने “शताब्दी-यात्रा: वीर विट्ठलभाई पटेल” शीर्षक से एक स्मारक ‘कॉफी टेबल बुक’ भी प्रकाशित की है, जो विधानसभा की संस्थागत और ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत करती है।

प्रतिभागियों के साथ चर्चा करते हुए अध्यक्ष ने दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक और संवैधानिक संदर्भों को साझा किया। उन्होंने याद दिलाया कि यह परिसर 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों और 1911 में राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने के बाद भारत के विधायी विकास के महत्वपूर्ण चरणों का गवाह रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि विधानसभा केवल एक विरासत संरचना नहीं है, बल्कि एक जीवंत संवैधानिक संस्था है जहां लोकतांत्रिक विचार-विमर्श सार्वजनिक जीवन को आकार देता है।