धान भंडारण केंद्रों में श्रमिकों की मजदूरी अटकी, दो माह से भुगतान नहीं

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धमतरी, 05 फ़रवरी । जिले के विभिन्न धान भंडारण केंद्रों में काम कर रहे श्रमिकों को पिछले दो माह से मजदूरी नहीं मिलने का मामला सामने आया है। संघ मर्यादित अंतर्गत भोयना, जवरगांव, चिटौद और भाटागांव स्थित धान भंडारण केंद्रों में भंडारण का कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन यहां कार्यरत 250 से अधिक श्रमिक दिसंबर और जनवरी माह की मजदूरी से वंचित हैं। समय पर भुगतान नहीं होने से श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

श्रमिकों का कहना है कि वे लगातार मेहनत कर रहे हैं, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उनके मेहनताना का भुगतान नहीं किया गया। कई परिवार ऐसे हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह इसी मजदूरी पर निर्भर है। मजदूरी नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी को कई बार अवगत कराया जा चुका है, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से श्रमिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

श्रमिकों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मार्कफेड के अंतर्गत करोड़ों रुपये के धान भंडारण का कार्य हो रहा है, लेकिन उसी कार्य में लगे श्रमिकों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। इतना ही नहीं, वर्ष 2022 में जिले के 24 अर्द्धकुशल श्रमिकों का एक माह का वेतन और दो माह की पीएफ राशि काटे जाने के बावजूद उनके खातों में जमा नहीं की गई। इस मामले को लेकर भी श्रमिक लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।

दौलत साहू, शक्ति साहू, भूपेश, सुरेंद्र, अनमोल, घनश्याम साहू, चोवाराम, बीरेंद्र साहू, दीपक यादव, दुष्यंत शर्मा, हेमराज, ज्ञानिक साहू, ओमप्रकाश, शंकर साहू और कामता साहू ने बताया कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी सुनील सिंह राजपूत ने कहा कि श्रमिकों के भुगतान के लिए शासन से पत्राचार किया गया है और जल्द ही लंबित मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा। अब देखना यह है कि श्रमिकों को उनका हक कब तक मिल पाता है।