नई दिल्ली, 21 फरवरी । भारत पर अमेरिका अब 18 फीसदी की जगह 10 फीसदी ही टैरिफ लगाएगा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित करने के बाद उन्होंने 3 घंटे के अंदर सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया। डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को इससे संबंधित एक आदेश पर हस्ताक्षर किए। यह टैरिफ 24 फरवरी से दुनियाभर के देशों पर लागू हो जाएगा।
ट्रंप के इस फैसले के बाद यह सवाल उठ रहे थे कि भारत और अमेरिका के बीच जो अंतरिम व्यापर समझौता हुआ था, उसके हिसाब से निर्धारित 18 फीसदी टैरिफ के ये अतिरिक्त शुल्क होगा या भारत पर सिर्फ 10 फीसदी ही टैरिफ लगेगा। ट्रंप ने कहा कि वह 24 फरवरी से अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 150 दिनों की अवधि के लिए 10 फीसदी अस्थायी टैरिफ लगा रहे हैं।
व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि भारत समेत अमेरिका के ट्रेडिंग पार्टनर, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले डोनाल्ड ट्रंप के एडमिनिस्ट्रेशन के साथ टैरिफ डील की थी, अब 10 फीसदी ड्यूटी का सामना करेंगे, भले ही वे पहले ज्यादा टैरिफ पर सहमत हुए हों। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिकी सु्प्रीम कोर्ट के उन न्यायाधीशों को लेकर “बेहद शर्मिंदा” हैं जिन्होंने शुल्क के संबंध में “अत्यंत निराशाजनक” फैसला दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये पारस्परिक टैरिफ 2025 और 2026 में लगाए थे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रख व्यापार से जुड़े दूसरे कई तरह के कदम उठाए थे। ट्रंप ने कहा था कि दूसरे देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का मकसद अमेरिकी व्यापार घाटे में कमी लाना है। हालांकि, इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ा झटका लगा था।
इस बीच अमेरिकी सरकार की एजेंसियों को दूसरे देशों के गुड्स पर टैरिफ का कलेक्शन तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द लागू हो जाएगा। इससे अमेरिका से व्यापार करने वाले एक्सपोर्ट्स को काफी राहत मिलेगी। उन्हें अपने गुड्स पर पारस्परिक टैरिफ नहीं चुकाना होगा। चीन सहित दुनिया के कई देश अमेरिका को रोजमर्रा की चीजों सहित कई तरह के गुड्स का निर्यात करते हैं।
नया 10 फीसदी टैरिफ 1974 के एक्ट के तहत लगाया गया
ट्रंप प्रशासन ने 10 फीसदी का नया टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत लगाया है। यह एक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति को 150 दिनों तक के लिए अस्थायी, गैरभेदभावपूर्ण टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस टैरिफ की अवधि बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसका मतलब है कि अगर ट्रंप दूसरे देशों पर 10 फीसदी टैरिफ को लगाए रखना चाहते हैं तो उन्हें अमेरिकी संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी।
भारत सहित दूसरे देशों के एक्सपोर्ट्स को बड़ी राहत
पारस्परिक टैरिफ हटने से भारत को भी बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया था। उन्होंने भारत के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का भी ऐलान किया था। अभी दोनों देशों के अधिकारी इस समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस पर अगले महीने दोनों देशों के हस्ताक्षर होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक शुल्कों को रद्द किए जाने और अमेरिका की ओर से 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लगाने के नए आदेश के बाद अब भारतीय वस्तुओं पर 24 फरवरी से केवल 10 फीसदी पारस्परिक शुल्क लगेगा, जिससे पहले के मुकाबले बोझ काफी कम हो जाएगा।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से दिए फैसले में कहा कि राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए व्यापक शुल्क कानून के दायरे से बाहर थे। ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित कर खारिज करने का यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा। इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आर्थिक एजेंडे के लिए झटका माना जा रहा है।
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