सीहोर, 17 फरवरी । कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि विद्रोही हमारे वेदों- शास्त्रों को नष्ट करने में लगे हैं और हमारे लोग मोबाइल और सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने धर्म वेदों और शास्त्रों को छोड़कर दूसरे धर्म की पुस्तकें पढ़ रहे हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने सीहोर जिले के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में आयोजित दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के चौथे दिवस मंगलवार को शिव महापुराण की कथा सुनाते हुए यह बात कही। रुद्राक्ष महोत्सव में मंगलवार को मुख्य आकर्षण बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन रहा। मंच पर जब दोनों संतों का मिलन हुआ, तो पूरा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा। धीरेंद्र शास्त्री ने अपने आशीष वचनों में कहा कि गुरु जी (पंडित प्रदीप मिश्रा) की कथा अपने शहर में सुनना भाग्य है, लेकिन कुबेरेश्वर धाम आकर सुनना परम सौभाग्य है। उन्होंने भक्तों को हनुमान और शिव की भक्ति का मार्ग दिखाया। पंडित प्रदीप मिश्रा सनातन धर्म को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा सुनाते हुए कहा कि भारत को प्राचीन काल से ही ज्ञानभूमि कहा गया है। यहां वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण जैसे महाकाव्यों से लेकर आयुर्वेद, ज्योतिष, योग, गणित, वास्तु और दर्शन तक अनेक शाखाएँ विकसित हुईं। संस्कृत, प्राकृत और क्षेत्रीय भाषाओं में रचित ग्रंथ केवल धार्मिक आस्था नहीं थे, बल्कि जीवन की वैज्ञानिक और सामाजिक समझ को भी दिशा देते थे। पहले टीवी कम थी, पुस्तकें ज्यादा थी, टाकिज कम थे, लाइब्रेरी अधिक थी, अब लोग मोबाइल और सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने धर्म वेदों और शास्त्रों को छोड़कर दूसरे धर्म की पुस्तकें पढ़ रहे हैं। उन्होंने सनातन धर्म को बचाने और उसकी संस्कृति को जीवित रखने के लिए सभी को एकजुट रहने का आह्वान किया।
पंडित मिश्रा ने कहा कि गलत संगत मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देती है, जबकि सुसंगत से जीवन संवरता है। इसलिए संगति का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। देवराज ब्राह्मण की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे गलत साथियों के कारण व्यक्ति का जीवन बिगड़ जाता है। सुबह की प्रार्थना और शाम की आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। एक लोटा जल भी जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है।
पंडित जी ने बताया कि सांसारिक रिश्ते मृत्यु के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन शिव से रिश्ता जन्मों-जन्मों का है। उन्होंने शिव-सती प्रसंग सुनाते हुए कहा कि महादेव ने सती के 88 लाख जन्म देखे हैं, जो सिद्ध करता है कि उनका संबंध अमर है। शिवरात्रि और नवरात्रि को ‘रात्रि’ से जोड़ने का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह रात के बाद सवेरा निश्चित है, उसी तरह संघर्ष के बाद सुख का आना भी तय है। पंडित जी ने ‘बटरफ्लाई इफेक्ट’ का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि तितली के पंख फड़फड़ाने से दुनिया पर असर हो सकता है, तो श्रद्धा से चढ़ाई गई बेलपत्री की डंडी और जल का फल क्यों नहीं मिलेगा?
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मोबाइल और लैपटॉप की दुनिया से बाहर निकलकर शास्त्रों और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पढ़ें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपने सनातन धर्म के ग्रंथों को छोड़कर दूसरों के पीछे भागना उचित नहीं है। भक्ति की शक्ति समझाने के लिए पंडित प्रदीप मिश्रा ने धनिया नामक भक्त की कथा सुनाई, जिसे भोलेनाथ ने उसकी निष्काम भक्ति के कारण मंदिर की सीढ़ियों पर ही दर्शन दे दिए थे। वहीं, मुद्गल ऋषि की कथा के माध्यम से उन्होंने ‘अतिथि देवो भव’ और दान के महत्व पर प्रकाश डाला, जहां स्वयं शिव ने परीक्षा लेकर उनके पूरे परिवार को अमर कर दिया।
पंडित मिश्रा ने सोशल मीडिया पर भ्रामक बातों से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पहाड़ से ठोकर नहीं लगती, छोटे पत्थरों से लगती है, वैसे ही छोटी-छोटी बातें घर तोड़ देती हैं।. कथा के अंत में उन्होंने प्रशासन, मीडिया और सेवादारों का आभार व्यक्त किया जो लाखों भक्तों की सेवा में जुटे हैं।
अखण्ड हिन्द फौज को सम्मानित किया
पंडित जी ने कुबेरेश्वर धाम में सेवा के लिए अखण्ड हिन्द फौज के 500 कैडेटों को सम्मानित भी किया और सभी को उपहार स्वरूप जैकेट प्रदान किया। फौज के महानिदेशक राजेन्द्र त्रिपाठी ने मंच से अखण्ड हिन्द फौज की सेवा के विषय में संक्षेप में बताया। उन्होंने सेवा का अवसर देने के लिए पूज्य गुरुदेव का आभार प्रकट किया। शिव-पार्वती और गणेश जी की भव्य झांकी तथा महाआरती के साथ हुआ। पंडित जी ने भक्तों को आह्वान किया कि यदि भरोसा हो तो ही कुबेरेश्वर धाम आएं, क्योंकि बाबा यहाँ से किसी को खाली हाथ नहीं भेजते।