प्रयागराज, 11 फरवरी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है तथा पूछा है कि क्या राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में मातृत्व लाभ का कानून लागू है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 (2017 के संशोधन सहित) को लागू करने संबंधी कोई अधिसूचना आधिकारिक गजट में जारी की गई है या नहीं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने वाराणसी स्थित सनबीम वूमेन्स कॉलेज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके जरिए सम्बंधित आयोग ने कॉलेज की एक महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ अधिनियम का लाभ देते हुए पुनः बहाल करने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 अपने आप शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होता। कहा गया कि अधिनियम की धारा 2(1) के प्रावधान के अनुसार किसी भी ऐसे संस्थान पर इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ आधिकारिक गजट में अलग से अधिसूचना जारी करनी होती है। याची के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब तक ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। कॉलेज की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि शैक्षणिक संस्थान ’प्रतिष्ठान’ की परिभाषा में नहीं आते, क्योंकि वे किसी प्रकार का व्यवसाय, व्यापार या पेशा नहीं करते। इसलिए बिना विशेष अधिसूचना के मातृत्व लाभ अधिनियम को निजी शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं किया जा सकता।
अपने इस तर्क के समर्थन में कालेज ने केरल हाइकोर्ट का फैसला चेयरमैन, पीएसएम कॉलेज ऑफ डेंटल साइंस एंड रिसर्च बनाम रेश्मा विनोद का हवाला दिया। जिसमें यह कहा गया कि राज्य सरकार की अधिसूचना के बिना मातृत्व लाभ अधिनियम निजी शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होता। इन दलीलों पर विचार करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार एक आवश्यक पक्ष है, क्योंकि “राज्य पर यह दायित्व है कि वह इस अधिनियम के अस्तित्व में रहते हुए विभिन्न प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों के हित में अधिसूचना जारी करे।”
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के माध्यम से औपचारिक रूप से मामले में पक्षकार बनाते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी। अंतरिम राहत देते हुए हाइकोर्ट ने आदेश दिया कि प्रतिवादी संख्या-5 की नौकरी को लेकर यथास्थिति बनाए रखी जाए। इसके अनुसार कोर्ट के आदेश पारित करते समय जो स्थिति है वही विपक्षी के सेवा में बहाली को लेकर होगी।