जयपुर, 14 फ़रवरी । वैशाली नगर के क्विन्स रोड पर स्थित झाड़खंड महादवे मंदिर अनूठी स्थापत्य शैली और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर विशेष रूप से दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण के रूप में जाना जाता है, जो राजस्थान में अन्य मंदिरों से एकदम अलग है। इस मंदिर को जयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और यहाँ हर वर्ष लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है, खासकर महाशिवरात्रि और सावन के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में भोले बाबा की पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते है।
गौरतलब है कि झाड़खंड महादेव मंदिर का इतिहास 1918 में शुरू होता है, जब बब्बू सेठ ने इस स्थान पर एक कुआं, कोठरी और तिबारा बनवाया था। इसे बाद में एक शिव मंदिर के रूप में विकसित किया गया। मंदिर के निर्माण में गोविंदनाथ बाबा का योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनके आशीर्वाद से यहाँ शिवलिंग की स्थापना की गई। यह मंदिर अपने 100 से अधिक वर्षों के इतिहास में कई धार्मिक आयोजनों का गवाह बन चुका है। गोविंदनाथ बाबा की समाधि भी मंदिर परिसर में स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
बताया जाता है कि झाड़खंड महादेव मंदिर की स्थापत्य शैली ऐसी है कि ये अन्य किसी मंदिरों में नहीं पाई जाती है। इस मंदिर की स्थापत्य शैली दक्षिण भारतीय मंदिरों से प्रेरित है। झाड़खंड मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर दक्षिण भारतीय शैली का गुंबद बना है। जबकि इस मंदिर के गर्भगृह का डिजाइन उत्तर भारतीय शैली के मंदिरों से प्रभावित है। मंदिर का निर्माण इस प्रकार से किया गया है कि एक प्राकृतिक पेड़ को काटने के बजाय उसे संरक्षित किया गया और उसी के आस-पास मंदिर का निर्माण किया गया। यह मंदिर अपने वास्तुकला में धार्मिक और पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक है। परिसर में हरियाली और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को शांति का अनुभव कराती है। झाड़खंड महादेव का मंदिर जयपुर में हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है। यहाँ विशेष रूप से सावन के महीने में श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर चार प्रहर की पूजा होती है, जिसमें शिव भक्त पूरे दिन और रात भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं।
मंदिर में दक्षिण भारतीय परंपराओं के अनुरूप बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें महाकुंभाभिषेकम् एक प्रमुख आयोजन है, जिसमें देशभर से जल लाकर मंदिर में अभिषेक किया जाता है। इस आयोजन में विशेष पूजन सामग्री का उपयोग भी किया जाता है, जो दक्षिण भारतीय विधियों के अनुसार होती है। यह आयोजन मंदिर की विशिष्टता और जयपुर में इसकी अहमियत को और बढ़ाता है।
झाड़खंड महादेव मंदिर का प्रबंधन बब्बू सेठ मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में किया जाता है, जो मंदिर की देखभाल और धार्मिक कार्यक्रमों का संचालन करता है। यह ट्रस्ट मंदिर के दैनिक संचालन और विशेष आयोजनों की निगरानी करता है और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।