भारत के साथ हुई ट्रेड डील अमेरिकी हित में : प्रणव

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रांची, 16 फ़रवरी । अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रणव झा ने कहा कि देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है, देश में जो हो रहा है वह रहस्यमय तरीके से हो रहा है। देश में हाे रहे फैसले की सही जानकारी आम लोगों को नहीं दी जा रही है।

प्रणव झा ने यह बातें सोमवार को कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कही। उन्होंने कहा कि यूएस ट्रेड डील अमेरिकी हित में है। इसमें भारत के लिए नुकसान है। उन्होंने कहा कि एपस्टिन फाइल में मोदी सरकार के मंत्री का नाम आना और अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर कसते शिकंजे के दबाव में यह डील संभव हुआ। वहीं केंद्र सरकार छह गुना टैरिफ बढ़ने की खुशी मना रही है।

प्रणव ने कहा कि 2025 में अमेरिका को हमारा निर्यात 86 बिलियन डॉलर और आयात 46 बिलियन डॉलर था। इस दौरान 40 बिलियन ट्रेड सरप्लस था, जबकि अब अमेरिका से 100 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त सामान खरीदना है। इससे सरप्लस ट्रेड डेफिसिट ट्रेड में बदल जाएगा। दूसरी ओर चीन के साथ पहले ही 116 बिलियन का व्यापार घाटा है। वहीं कृषि क्षेत्र को भी अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है। अमेरिकी किसानों को 64 लाख रुपए सब्सिडी प्रतिवर्ष मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को मुश्किल से 12000 रुपये सब्सिडी प्रतिवर्ष दी जाती है।

उन्होंने कहा कि कपास किसानों के लिए यह ट्रेड डील तबाही की तरह है।

अमेरिका के आदेश पर तेल खरीदना बंद कर देगा भारत

उन्होंने कहा कि अमेरिका के आदेश पर भारत रुस से तेल खरीदना बंद कर देगा, जबकि अपनी जरूरत का 40 प्रतिशत सस्ता तेल भारत अभी रुस से खरीदता था। वहीं भारत अब अमेरिकी आदेश पर तेल वेनेजुएला से खरीदेगा और अमेरिका इसकी निगरानी भी करेगा। प्रणव ने कहा कि वे जानना चाहते हैं कि क्या इस डील से पहले राज्यों से व्यापक परामर्श किया गया।

साथ ही कहा कि क्या संसद में इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक की जाएंगी और किसानों एवं छोटे उद्योगों की हितों की रक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं। झारखंड जैसे खनन आधारित राज्यों के लिए क्या विशेष प्रावधान है।

मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि इस ट्रेड डील में देश की संप्रभुत्ताश और स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ किया गया है। मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को अराजकता में धकेलने वाले समझौते किए हैं।

उन्‍होंने कहा कि वर्ष 2014 के पहले मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी का 17 प्रतिशत तक हुआ करता था जो अब घटकर 12.50 प्रतिशत रह गया है। सरकार का मेक इन इंडिया कार्यक्रम इंपोर्ट फ्रॉम एब्रॉड बनकर रह जाएगा।

मौके पर रविंद्र सिंह, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुजनी, सोनाल शांति सहित अन्य अपस्थित थे।