हिसार : विकासशील से विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर भारत : प्रो. नरसी राम बिश्नोई

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प्रो. एनके बिश्नोई व कार्यशाला के समन्वयक डा. सोमनाथ उपस्थित रहे।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि वर्तमान

समय में रोजगार की संभावनाएं उन्हीं विद्यार्थियों के लिए बेहतर हैं, जो डाटा विश्लेषण,

इकोनोमेट्री टूल्स तथा सांख्यिकी सॉफ्टवेयर में दक्ष होंगे।

मुख्य वक्ता प्रो. अंकुश अग्रवाल ने अपने संबोधन

में कार्यशाला के शैक्षणिक स्वर को स्थापित किया तथा जटिल आर्थिक परिघटनाओं को समझने

और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में मात्रात्मक अर्थशास्त्र की भूमिका को रेखांकित

किया। उन्होंने अर्थमिति के विकास एवं उसके अनुप्रयोगों पर विस्तृत जानकारी दी, जिसमें

उन्होंने सैद्धांतिक आधार से लेकर आधुनिक अनुभवजन्य एवं नीतिगत उपयोग तक की यात्रा

के बारे में बताया।

विषय विशेषज्ञ डा. सुनील कुमार ने ‘रियल टाइम

डाटा का उपयोग करते हुए अर्थमितीय माॅडलिंग’ विषय पर सत्र का संचालन किया। इसमें अर्थमितीय उपकरणों के

व्यावहारिक प्रयोग, डाटा प्रबंधन तथा प्रौद्योगिकी-समर्थित अनुभवजन्य विश्लेषण पर विशेष

ध्यान दिया गया।

अधिष्ठाता प्रो. एनके बिश्नोई ने अपने धन्यवाद

संबोधन में आयोजत समिति प्रयासों एवं संसाधन व्यक्तियों के बहुमूल्य योगदान की सराहना

की।

विभागाध्यक्ष प्रो. अश्वनी कुमार ने अपने स्वागत

संबोधन में बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य समकालीन शैक्षणिक एवं नीतिगत आवश्यकताओं

के अनुरूप अर्थशास्त्र में विश्लेषणात्मक एवं डाटा-आधारित कौशल को सुदृढ़ करना है। उन्होंने

बताया कि 11 फरवरी तक चलने वाली इस कार्यशाला में स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों

एवं पीएचडी शोधार्थियों सहित लगभग 50 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कार्यशाला के दौरान

विभिन्न सत्रों को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी दिल्ली, जवाहर लाल नेहरू

विश्वविद्यालय, एनआईटी, कुरूक्षेत्र, इंस्टीट्यूट फाॅर स्टडीज इन इंडस्ट्रीयल डेवलेपमेंट,

बीआईटीएस पिलानी, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ

संबोधित करेंगे। कार्यशाला समन्वयक डा. सोमनाथ ने धन्यवाद प्रस्तुत किया।