गोयल ने मेडटेक स्टार्टअप्स से ग्लोबल होने और व्‍यापार समझौतों का फायदा उठाने की अपील की

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नई दिल्‍ली, 12 फरवरी । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत आज टेक्नोलॉजी में सबसे आगे है। उन्‍होंने मेडटेक स्टार्टअप्स से घरेलू बाजार से आगे देखने, भारत के बढ़ते व्यापार समझौतों का फायदा उठाने तथा देश और दुनिया दोनों की सेवा के लिए सस्ते इनोवेशन को बढ़ाने की अपील की, जो दुनिया की जीडीपी का लगभग 70 फीसदी हिस्सा कवर करते हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने ‘मेडटेक, इनोवेशन और स्टार्टअप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कहीं। गोयल ने कहा कि भारत के अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से घरेलू चिकित्सा उपकरण उद्योग को रियायती शुल्कों पर व्यापक बाजार पहुंच प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि कुछ एफटीए में भारतीय चिकित्सा उपकरणों को शुल्क में छूट भी मिलेगी।

गोयल ने कहा, ‘‘हम नौ एफटीए के माध्यम से विकसित बाजारों के लिए द्वार खोल रहे हैं, जिनमें 38 ऐसे देश शामिल हैं जहां की आबादी समृद्ध है और प्रति व्यक्ति आय अधिक है।’’ उन्‍होंने कहा, “भारतीय स्टार्ट-अप और इनोवेशन सिस्टम को बढ़ते देखना एक अद्भुत एहसास है।’’

वाणिज्‍य मंत्री ने कहा कि हमारे इनोवेटर्स को देशभक्ति की भावना के साथ काम करते देखना हमें पूरा विश्वास दिलाता है कि भारत सही रास्ते पर है। गोयल ने कहा कि ‘‘आज, इस इवेंट में मुझे देश के 140 करोड़ लोगों द्वारा लिए गए विकसित भारत के वादे की झलक देखने का सौभाग्य मिला…।”

वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने बताया कि भारत को अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी धागा और कपास से बने परिधान पर वही रियायती शुल्क का लाभ मिलेगा, जो बांग्लादेश को वर्तमान में मिल रहा है। पीयूष गोयल ने कहा, ‘‘बांग्लादेश को जो मिला है, वही भारत को भी अंतिम समझौते में मिलने वाला है।’’

उन्होंने बताया कि अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका से धागा और कपास खरीदकर परिधान बनाती है और उन्हें यूएस को निर्यात करती है, तो उन परिधानों को भी बांग्लादेशी कंपनियों की तरह अमेरिका में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा। गोयल ने कहा कि यह बात अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में लिखी है और ‘‘हमारे समझौते में भी होगी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि इसका भारतीय कपास किसानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री ने बताया कि अमेरिका में कपास का उत्पादन सीमित है। उसका निर्यात केवल 50 लाख अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारत का लक्ष्य 50 अरब अमेरिकी डॉलर है। उन्‍होंने कहा कि भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली है। इसे मार्च में लागू किए जाने की संभावना है।

केंद्रीय वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री की ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण हैं क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया था कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता ‘पूरी तरह से आत्मसमर्पण’ है, जिसमें भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई है और किसानों के हितों से समझौता किया गया है।