शिमला, 09 फ़रवरी । भाजपा के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने राज्य की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि प्रदेश में जिस वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक पैदा नहीं हुआ बल्कि इसके संकेत वर्षों पहले ही मिल चुके थे। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के चरणबद्ध रूप से समाप्त होने की जानकारी पहले से थी, फिर भी राज्य सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई।
प्रो. धूमल ने सोमवार काे एक बयान में कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट में यह स्पष्ट था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी। यह कोई नई या अप्रत्याशित घोषणा नहीं है। जब यह तथ्य पहले से ज्ञात था तो सरकार को उसी अनुरूप अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व है। इसलिए भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक संकट संसाधन-सीमित राज्यों में आते रहते हैं लेकिन समझदारी यह है कि उनसे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में उनकी सरकार ने वित्तीय अनुशासन अपनाया, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के खर्चों पर नियंत्रण रखा और अनावश्यक सुविधाओं में कटौती की।
उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने कृषि और बागवानी में सुधार कर आय बढ़ाने पर जोर दिया। सब्ज़ी उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देकर लगभग 250 करोड़ के कारोबार को बढ़ाकर 2250 करोड़ रुपये तक पहुंचाया गया, जिससे राजस्व बढ़ा और बजट संतुलन में मदद मिली।
वर्तमान सरकार पर परोक्ष निशाना साधते हुए प्रो. धूमल ने कहा कि एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है। यदि स्थिति सच में गंभीर है, तो सबसे पहले गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सख्त वित्तीय अनुशासन, खर्चों में कटौती और ठोस नीतियों से ही आर्थिक संकट का समाधान संभव है।