बूंदी/जयपुर, 09 फ़रवरी । पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल लिंक परियोजना (राम जल सेतु लिंक परियोजना) जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सोमवार को जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बूंदी जिले के गुहाटा क्षेत्र में परियोजना के प्रगतिरत कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट स्थल पर अभियंताओं से चर्चा कर परियोजना की विस्तृत जानकारी ली।
जल संसाधन मंत्री ने करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर एक्वाडक्ट के प्रत्येक बिंदु का गहन निरीक्षण किया और कार्यों को गुणवत्ता के साथ तय समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में जल सुरक्षा की दिशा में यह एक्वाडक्ट परियोजना मील का पत्थर सिद्ध होगी। इसके कार्य मिशन मोड पर किए जा रहे हैं।
रावत ने बताया कि चंबल नदी पर 2.3 किलोमीटर लंबा एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है, जिसे जून 2028 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। राम जल सेतु लिंक परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत लगभग 2 हजार 330 करोड़ रुपए की लागत से यह एक्वाडक्ट निर्माणाधीन है। यह कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव को बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव से जोड़ेगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज से पानी को पंप हाउस के माध्यम से लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद मेज बैराज से पंप हाउस और फीडर के जरिए गलवा बांध तक पानी पहुंचाया जाएगा, जहां से बीसलपुर और ईसरदा बांध में जल आपूर्ति की जाएगी।
एक्वाडक्ट के निर्माण से आमजन को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा।
चंबल नदी पर बन रहे इस एक्वाडक्ट की कुल लंबाई 2280 मीटर है, जिसकी आंतरिक चौड़ाई 41.25 मीटर और ऊंचाई 7.7 मीटर है। परियोजना का शुभारंभ मई 2025 में किया गया था। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदृष्टि और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का बड़ा उदाहरण है। जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में यह योजना प्रदेश के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी और राजस्थान को जल आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने बताया कि ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की लागत वाली संशोधित पार्वती–कालीसिंध–चंबल लिंक परियोजना तैयार की गई है। परियोजना के प्रथम चरण में राज्य के 17 जिलों की करीब 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, जिससे प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
निरीक्षण के बाद रावत ने अभियंताओं के साथ समीक्षा बैठक भी की और कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।