बिहार अब केवल साहित्य एवं लोककला तक सीमित नहीं, सिनेमा में भी बना रहा राष्ट्रीय पहचान : मनोज बाजपेयी

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पटना, 10 फ़रवरी । बिहार अब केवल साहित्य और लोककला तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि फिल्म निर्माण और थिएटर के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है। ये बातें बॉलीवुड अभिनेता और पद्मश्री से सम्मानित कलाकार मनोज बाजपेयी ने मंगलवार को अपने बिहार संग्रहालय भ्रमण के दौरान कहीं।

मनोज बाजपेयी ने बताया कि वे इस नीति के निर्माण की शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं। नीति लागू होने के बाद यह पूरे देश के फिल्म निर्माताओं को बिहार की ओर आकर्षित कर रही है, जो राज्य के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति से आने वाले समय में फिल्म निर्माण को गति मिलेगी।

बाजपेयी ने यह भी कहा कि यदि राज्य में बेहतर शूटिंग लोकेशन, तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जाएं, तो स्थानीय युवाओं को अभिनय और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में बड़ा अवसर मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार की सामाजिक कहानियां और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सिनेमा के लिए बेहद समृद्ध विषय हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को विशेष रूप से बिहार म्यूजियम का भ्रमण कराया जाए, ताकि वे राज्य और देश की महान इतिहास, विरासत एवं सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हो सकें।

इस दौरान विभागीय सचिव ने उनसे बिहार फ़िल्म प्रोत्साहन नीति पर परिचर्चा की और कहा कि बिहार अपनी फिल्मी पृष्ठभूमि पर नई पहचान बना रहा है। इससे अभिनेता और फिल्म निर्माताओं को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा और इस बदलते परिवेश में उनसे सकारात्मक सहभागिता अपेक्षित है।

मनोज बाजपेयी ने म्यूजियम में प्रदर्शित भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंडों—पाषाण काल, नवपाषाण और ताम्रपाषाण काल, मौर्य काल, मगध, गुप्त काल से लेकर मुगल काल तक की समृद्ध ऐतिहासिक यात्रा को मूर्तियों, बर्तनों, खिलौनों और औजारों के माध्यम से गहराई से देखा और समझा।