रोहित शर्मा ने भारत की व्हाइट-बॉल क्रांति की अगुवाई करके टीम को नई पहचान दी : राहुल द्रविड़

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बेंगलुरु, 27 जनवरी । पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ ने कहा है कि रोहित शर्मा ने भारत की व्हाइट-बॉल क्रिकेट में बदलाव की प्रक्रिया का नेतृत्व करके टीम को एक नई सोच व आक्रामक पहचान दी।

द्रविड़ ने यह बातें लेखक आर. कौशिक की पुस्तक ‘द राइज ऑफ द हिटमैन’ के विमोचन समारोह के दौरान कहीं, जिसका आयोजन केएससीए में जैन स्पोर्ट्स ने किया। द्रविड़ ने आगामी आईसीसी पुरुष टी-20 विश्व कप को लेकर भारत को प्रबल दावेदार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने टी-20 क्रिकेट में लगभग 80 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है, जो इस फॉर्मेट में असाधारण है। भारत निश्चित रूप से पसंदीदा के तौर पर उतरेगा और सेमीफाइनल तक पहुंचेगा, लेकिन टी-20 में नतीजा उसी दिन बेहतर खेलने वाली टीम तय करती है।

रोहित शर्मा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए द्रविड़ ने कहा कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत थी। रन रेट बढ़ रहे थे, जोखिम लेना जरूरी हो गया था और हमें खुद को ढालना था। रोहित ने यह जिम्मेदारी खुद ली। उन्होंने उदाहरण पेश किया कि टीम का कप्तान खुद आगे बढ़कर टेम्पो सेट करे, भले ही इससे व्यक्तिगत आंकड़ों पर असर पड़े। उन्होंने आगे कहा कि रोहित की नेतृत्व क्षमता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कप्तान बनने के बाद भी टीम को कभी नहीं लगा कि वह बदले हैं। यह गुण बहुत कम नेताओं में देखने को मिलता है।

कार्यक्रम में कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (केएससीए) अध्यक्ष और द्रविड़ के पूर्व साथी वेंकटेश प्रसाद वर्चुअल रूप से जुड़े। उन्होंने रोहित शर्मा को पद्म श्री से सम्मानित किए जाने को पूरी तरह योग्य बताया। प्रसाद ने कहा कि रोहित ने सभी फॉर्मेट में लंबा और शानदार करियर बनाया है। वह दो टी20 विश्व कप जीतने वाले इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं। अंडर-19 दिनों को याद करते हुए प्रसाद ने कहा कि मैंने रोहित को 16-17 साल की उम्र से देखा है। तब भी उनके पास असाधारण समय और क्लास थी। उनकी प्रतिभा की तुलना भारत के किसी भी महान बल्लेबाज से की जा सकती है।

समारोह में रोहित शर्मा के योगदान, नेतृत्व और भारतीय क्रिकेट पर उनके प्रभाव को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसने एक बार फिर ‘हिटमैन’ की विरासत को रेखांकित किया।