ग्रामीणों ने सुरक्षाबलों के साथ मिलकर आज पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण खुलकर शामिल हुए।
लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर संभाग के इन 41 गांवाें राष्ट्रीय पर्व मनाना भी संभव नहीं था। यह अवसर क्षेत्र के इतिहास में लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना का साक्षी बना । बस्तर में चार दशकों से चली आ रही नक्सल हिंसा के अंधकार के बाद अब शांति, विश्वास और लोकतंत्र का उजाला स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन 41 गांवों में पहली बार ध्वज फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया गया, जिसमें 1. उल्लूर, 2. चिलमसका, 3.पेद्दाकोमरा, 4. कोप्पागुड़ा (पीड़िया), 5. बेलनार, 6. ताड़पाल, 7. कंडालापर्ती, 8. पिल्लूर, 9. डोडीसुमार, 10. कमालूर, 11. डोडीमरका, 12. पल्लेवाया, 13. सागमेटा, 14. एडजुम, 15. इदवाया, 16. आदेर, 17. कुड़मेल, 18. काेंगे, 19. सितरम, 20. ताेके, 21. पदमेटा, 22. लंका, 23. परियाादी, 24. काकुर, 25. बालेबेड़ा, 26. काेड़ेनार, 27. अंडेगपार, 28. मंदाेड़ा, 29. जटवर, 30. वाड़ापेंदा, 31. कोडलियार, 32. तुमालभट्टी, 33. वीरागंगलेर, 34. मैता, 35. पालागुड़ा, 36.गुण्डराजगुड़ेम, 37. नागाराम, 38. वंजलवाही, 39. गाेगुंड़ा, 40. पेद्दाबाेड़केल 41. उरसांगल शामिल हैं।
केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति, सुरक्षाबलों की निरंतर और प्रभावी कार्रवाई तथा स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से जिले के हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है, जिससे इन दुर्गम गांवों में सुरक्षा एवं प्रशासन की सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित हुई है । इन प्रयासों के परिणामस्वरूप इस वर्ष ऐसे 41 गांव जुड़े, जहां ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों ने सुरक्षाबलों के साथ मिलकर गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व उत्साहपूर्वक मनाया।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की सतत मौजूदगी से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। जिन क्षेत्रों में पहले राष्ट्रीय पर्व मनाने पर प्रतिबंध था, वहां आज ग्रामीण स्वयं उत्साह के साथ तिरंगा फहराने एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आगे आ रहे हैं। यह बदलाव क्षेत्र को नक्सलवाद के भय से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है ।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि बीते चार वर्षों में बस्तर संभाग में लगभग 135 नए सुरक्षा और सुविधा कैंप स्थापित किए गए। जिससे नक्सलियाें के कॉरिडोर ध्वस्त हुए, नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व या तो मारे गए या मुख्यधारा में लौट आए। उन्हाेने कहा कि जिन इलाकों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना असंभव था, वहां आज लोग स्वयं आगे बढ़कर तिरंगा फहरा रहे हैं।
उन्हाेंने बताया कि बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत इलाका अब नक्सल हिंसा से मुक्त हाे गया है। इस गणतंत्र दिवस पर बस्तर के नक्सल प्रभावित 41 गांवों में तिरंगा शान से लहराया।