कानपुर, 28 जनवरी । अनुभव के माध्यम से सीखना विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होता है। इससे उनमें विज्ञान को समझने की जिज्ञासा बढ़ती है और सोचने-समझने की क्षमता विकसित होती है। साइंस बस जैसी पहले बच्चों को किताबों से बाहर निकालकर विज्ञान को उनके रोज़मर्रा के जीवन से जोड़ती है। यह चलती-फिरती विज्ञान प्रदर्शनी बच्चों को स्वयं करके सीखने का अवसर देती है, जिससे उन्हें विषय को आसानी से समझने में मदद मिलती है और क्षेत्र के युवा विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। यह बातें बुधवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो वंदना सिंह ने कही।
सामाजिक सहभागिता और जमीनी स्तर पर एसटीईएम शिक्षा को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर साइंस बस परियोजना के माध्यम से स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रहा है। आईआईटी कानपुर द्वारा डिजाइन और विकसित यह पहल उत्तर प्रदेश के दूरदराज और वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और अनुभवात्मक (हैंड्स-ऑन) सीख को लोकप्रिय बनाने का लक्ष्य रखती है।
साइंस बस परियोजना की शुरुआत आईआईटी कानपुर के प्रो. दीपू फिलिप और प्रो. सत्यकी रॉय ने काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उत्तर प्रदेश के सहयोग से की जो मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करती है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, मटेरियल साइंस और डिजाइन जैसे विषयों में इंटरैक्टिव सीख के अनुभव प्रदान करने वाली यह मोबाइल प्रयोगशाला अपने आरंभ से ही एक अनूठी पहल रही है। यह बस विविध प्रयोगशाला उपकरणों, वैज्ञानिक यंत्रों और शिक्षण सामग्री से सुसज्जित है, जो विद्यार्थियों को अनेक विषयों में व्यावहारिक प्रयोग करने में सक्षम बनाती है।
आईआईटी कानपुर की एक विशेषज्ञ आउटरीच टीम इन सत्रों का संचालन करती है और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों तथा आधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी को रोचक और सुलभ ढंग से प्रस्तुत करती है। लाइव प्रदर्शनों में दूरबीनों, 3डी प्रिंटरों, रसायन विज्ञान प्रयोग सेट-अप, विभिन्न भौतिक विज्ञान मॉडलों, स्मार्ट सामग्री आदि का उपयोग शामिल है, जिससे विद्यार्थियों को उन्नत उपकरणों और समकालीन वैज्ञानिक प्रथाओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।