काठमांडू, 18 जनवरी । निर्वाचन आयोग ने सोमवार से निर्वाचन आचार संहिता लागू करने का निर्णय लिया है। आयोग की रविवार को हुई बैठक में कल से आचार संहिता लागू करने का फैसला लिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और उसके अलावा एक लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामांकन से एक दिन पहले आचार संहिता लागू की जा रही है। नामांकन पंजीकरण की तिथि 20 जनवरी निर्धारित है। आचार संहिता के तहत चुनावी प्रचार-प्रसार, उम्मीदवारों की गतिविधियों, सरकार द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों तथा संचार माध्यमों में प्रकाशित होने वाली खबरों की निगरानी की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने सरकारी संसाधनों और साधनों का दुरुपयोग कर किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।
साथ ही, सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। गलत, भ्रामक सूचना, द्वेषपूर्ण अभिव्यक्ति या एआई के दुरुपयोग के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने पर भी रोक लगाई गई है। आचार संहिता के अनुसार मतदान से 48 घंटे पहले मौन अवधि लागू होगी। राजनीतिक दल टेलीविजन और रेडियो पर अधिकतम दिन में चार बार ही विज्ञापन प्रसारित कर सकेंगे। प्रत्येक विज्ञापन की अवधि अधिकतम एक मिनट होगी और विज्ञापनों के बीच कम से कम एक घंटे का अंतर होना चाहिए। संचार माध्यमों को यह स्पष्ट करना होगा कि विज्ञापन सशुल्क है।
राजनीतिक दल चुनाव के लिए खोले गए कार्यालयों में तीन फीट ऊंचाई और चार फीट लंबाई तक के बैनर लगा सकेंगे। टी-शर्ट, कैप, बैग आदि पर चुनाव चिह्न छापने या उनका वितरण करने की अनुमति नहीं होगी। आचार संहिता के तहत अंतिम मत परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर उम्मीदवारों को अपने चुनावी खर्च का विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। उम्मीदवारों को चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा और 50 हजार रुपये से अधिक का भुगतान बैंक के माध्यम से ही करना होगा।
उम्मीदवार अधिकतम दो वाहन और चार घोड़े (घोड़े/घोड़े-गाड़ी) का उपयोग कर सकेंगे। चुनाव में विदेशी नंबर प्लेट वाले वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी तरह, सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से रोका गया है। कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी किसी भी दल के पक्ष या विपक्ष में प्रचार नहीं कर सकेंगे। सोशल मीडिया पर भी किसी प्रकार की राजनीतिक पोस्ट करने पर रोक लगाई गई है।
आचार संहिता लागू होने के बाद चुनावी प्रचार-प्रसार में बच्चों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। विद्यालयों और विश्वविद्यालय परिसरों के भीतर राजनीतिक सभाएं या प्रचार पूरी तरह निषिद्ध रहेंगे। सरकार के मंत्री और स्थानीय कार्यपालिकाएं किसी भी योजना का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं कर सकेंगी। नए पदों के सृजन या पदपूर्ति पर भी रोक रहेगी। इसी तरह, सरकारी दौरों के दौरान किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार करने की अनुमति नहीं होगी।