भोपाल में 150 पेड़ों की कटाई का विरोध, कर्मचारियों ने किया ‘चिपको आंदोलन’

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भोपाल, 22 जनवरी । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ओर हरियाली बचाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी निर्माण के लिए सैकड़ों पुराने पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। भाेपाल में अयोध्या बायपास और रत्नागिरी क्षेत्र के बाद अब एमपी नगर में प्रस्तावित खाद्य भवन निर्माण के लिए करीब 150 पेड़ों को काटने की तैयारी है। ये पेड़ 40 से 50 साल पुराने बताए जा रहे हैं। इस फैसले के विरोध में पर्यावरणविदों के साथ-साथ विभागीय कर्मचारी भी सड़कों पर उतर आए हैं।

गुरुवार को कर्मचारियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने परिसर में पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लीं और काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। महिला कर्मचारी भी बड़ी संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल रहीं।

6 मंजिला भवन का प्रस्ताव, 100 करोड़ तक खर्च का अनुमान

जानकारी के अनुसार, वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन ने सभी संबंधित विभागों के दफ्तरों को एक स्थान पर शिफ्ट करने के उद्देश्य से 6 मंजिला नए खाद्य भवन का प्रस्ताव तैयार किया है। यह भवन एमपी नगर स्थित नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय की करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर बनाया जाना है। भवन निर्माण पर लगभग 64 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जबकि सभी सुविधाओं सहित कुल लागत 90 से 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि यह खर्च उस स्थिति में किया जा रहा है, जब वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन, खाद्य संचालनालय और नाप-तौल विभाग के अपने-अपने सरकारी भवन पहले से मौजूद हैं। केवल नागरिक आपूर्ति निगम (नान) ही फिलहाल किराए के भवन में संचालित हो रहा है।

50 साल पुरानी बिल्डिंग, फिर भी तोड़ने की तैयारी

वर्तमान में प्रस्तावित स्थल पर नाप-तौल विभाग का मुख्यालय संचालित है। हालांकि संभागीय और जिला कार्यालयों को पहले ही जेके रोड स्थानांतरित किया जा चुका है। करीब 50 साल पुरानी यह बिल्डिंग अच्छी स्थिति में बताई जा रही है। कर्मचारियों के मुताबिक, नाप-तौल विभाग ने तीन महीने पहले ही पास की जमीन शासन से मांगी थी, ताकि अतिरिक्त सुविधाओं का विकास किया जा सके। दूसरी ओर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का संचालनालय विध्यांचल भवन में है, जबकि वेयर हाउसिंग की खुद की बड़ी इमारत गौतम नगर में स्थित है।

कर्मचारी बोले—एक विभाग के लिए इतना खर्च उचित नहीं

मप्र नाप-तौल अधिकारी-कर्मचारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम को छोड़कर बाकी सभी विभागों के पास अपने सरकारी भवन हैं। केवल एक विभाग के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च करना और 150 पेड़ों की बलि देना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि तीन साल में भवन बनता है, तो इस दौरान मुख्यालय को किराए पर रखने में लाखों रुपए खर्च होंगे। तिवारी ने कहा कि पेड़ों को बचाने के लिए कर्मचारियों ने भोजन अवकाश के दौरान शांतिपूर्ण ‘चिपको आंदोलन’ किया। गुरुवार से सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं।

सात साल पहले भेजे गए थे कार्यालय बाहर

कर्मचारियों ने बताया कि जगह की कमी का हवाला देकर सात साल पहले नाप-तौल मुख्यालय से उप नियंत्रक और निरीक्षक कार्यालयों को करीब 50 लाख रुपए खर्च कर जेके रोड स्थित 5 हजार वर्गफुट के भवन में शिफ्ट किया गया था। वहां कर्मचारियों के बैठने और जब्त सामग्री रखने तक की पर्याप्त जगह नहीं है। वहीं, मुख्यालय में टैंक लॉरी कैलिब्रेशन सुविधा के लिए 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी मांगी जा चुकी है। फिलहाल पेड़ों की कटाई और नए भवन निर्माण को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। कर्मचारी और पर्यावरणविद् इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।