वैश्विक विकास का डबल इंजन बनेंगे भारत-यूरोप: प्रधानमंत्री मोदी

Share

नई दिल्ली, 27 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच संपन्न हुआ व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के रिश्तों में नए युग की शुरुआत है और यह साझेदारी पूरी दुनिया के लिए विकास का “डबल इंजन” साबित होगी। उन्होंने बिजनेस कम्युनिटी से इस ऐतिहासिक अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए भरोसेमंद सप्लाई चेन, नई टेक्नोलॉजी और टिकाऊ विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने यहां भारत मंडपम में आयोजित इंडिया-ईयू बिजनेस फोरम में भाग लेते हुए कहा कि हालिया ऐतिहासिक फैसलों के बाद अब बिजनेस कम्युनिटी पर विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि व्यापार जगत के सक्रिय सहयोग से ही भारत-ईयू साझेदारी को भरोसा, पहुंच और बड़ा आकार मिलेगा तथा मिलकर समृद्धि के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बिजनेस समुदाय एफटीए में मिलने वाले अवसरों का भरपूर लाभ उठाएगा। यह समझौता भारत और यूरोपियन यूनियन, दोनों की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इससे बिजनेस पार्टनरशिप को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इस संदर्भ में तीन प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया।

मोदी ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर व्यापार, टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में जोखिम कम करने और बाहरी निर्भरता घटाने के लिए भारत और यूरोपियन यूनियन को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दोनों पक्षों का बिजनेस समुदाय इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, बैटरी, सेमीकंडक्टर्स और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एपीआई) जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता कम कर सकता है और भरोसेमंद सप्लाई चेन का साझा विकल्प तैयार कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने दूसरी प्राथमिकता के रूप में रक्षा उद्योग और नई टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों ही डिफेंस, स्पेस, टेलीकॉम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं और इन सेक्टर्स में साझेदारी को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

तीसरी प्राथमिकता पर बोलते हुए मोदी ने कहा कि स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य भारत और यूरोपियन यूनियन, दोनों के लिए अहम है। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी और स्मार्ट ग्रिड से लेकर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और सस्टेनेबल मोबिलिटी तक संयुक्त अनुसंधान और निवेश बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। इसके साथ ही जल प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में मिलकर समाधान विकसित करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एफटीए से भारत के लेबर-इंटेंसिव उत्पादों को यूरोपियन यूनियन के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा। इससे विशेष रूप से टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान, फल-सब्जियां, प्रोसेस्ड फूड और समुद्री उत्पादों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, मछुआरों और सर्विस सेक्टर, खासकर आईटी, शिक्षा, पारंपरिक चिकित्सा और बिजनेस सेवाओं को सीधा फायदा पहुंचेगा।

मोदी ने कहा कि यह भारत-यूरोपियन यूनियन संबंधों में नए युग का शंखनाद है। पहली बार यूरोपियन यूनियन के नेताओं का भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना, भारत के इतिहास का सबसे बड़ा एफटीए संपन्न होना और इतने बड़े स्तर पर इंडिया-ईयू बिजनेस फोरम का आयोजन- ये सभी उपलब्धियां दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच अभूतपूर्व तालमेल का प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच व्यापार दोगुना होकर 180 अरब यूरो तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत में 6,000 से अधिक यूरोपियन कंपनियां कार्यरत हैं, जबकि यूरोपियन यूनियन में लगभग 1,500 भारतीय कंपनियां मौजूद हैं। यूरोपियन कंपनियों का भारत में निवेश 120 अरब यूरो से अधिक है, जबकि यूरोपियन यूनियन में भारतीय निवेश करीब 40 अरब यूरो तक पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपियन यूनियन वैश्विक स्थिरता के लिए साझा प्राथमिकताएं रखते हैं और एक खुली समाजिक व्यवस्था के तौर पर दोनों के लोगों के बीच स्वाभाविक जुड़ाव है। इसी मजबूत आधार पर अब इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा रहा है और इसे दुनिया की सबसे प्रभावशाली पार्टनरशिप में से एक के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने बिजनेस लीडर्स से आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत-ईयू साझेदारी को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर पूरे समाज की साझेदारी में बदला जाए, ताकि इसके लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सके।