शिमला, 30 जनवरी । शहीद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ शुक्रवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि अर्पित करने के उपरान्त कांग्रेस के नेताओं ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने और योजना को कमजोर किए जाने के विरोध में प्रातः 11ः00 बजे से दोपहर 1ः00 बजे तक दो घंटे का उपवास रखा।
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने, न केवल मनरेगा का नाम बदला है बल्कि योजना के मूल स्वरूप को भी कमज़ोर किया है। पहले यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान करती थी, लेकिन अब रोज़गार के अवसरों में कटौती की जा रही है।
सुक्खू ने कहा कि पहले गांव के प्रधानों को मनरेगा के तहत सड़क निर्माण जैसे कार्य करवाने की शक्तियां प्राप्त थीं, जिससे लोगों को अपने घर-द्वार के निकट रोज़गार मिलता था। कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने लोगों को रोज़गार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि अब पंचायत प्रधानों की शक्तियां छीन ली गई हैं।
सेब पर आयात शुल्क में कमी से जुड़े सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ आयोजित पिछली बैठक में उनसे न्यूजीलैंड से आयातित सेब पर शुल्क कम करने का मुद्दा उठाया था। आयात शुल्क में किसी भी प्रकार की कमी हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को गंभीर नुक़सान पहुंचाएगी। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से अधिकारियों और बाग़वानों की एक टीम भेजने को कहा है, जिसके उपरान्त केंद्र सरकार इस विषय के सभी पहलुओं की गंभीरतापूर्वक जांच कर चर्चा करेगी।