रायपुर, 28 जनवरी । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थिति नवा रायपुर में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में काम करने वाली रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान दो सदस्यों की मौत हो गई। लोक शिक्षण संचालनालय ने बयान जारी कर बताया कि दोनों ही मामलों में मौत का धरना स्थल या हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। राज्य शासन सभी रसोईयों के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है तथा उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को लेकर सजग है।
रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम राज कश्यप ने आज जानकारी दी है कि धरना स्थल तुता नया रायपुर में बैठे प्रदर्शनकारियों में से दो महिला की मौत हो गई है। जिसमें दुलारी यादव शासकीय प्राथमिक शाला सलधा की रसोईया है, जिसे 25 जनवरी को अचानक तबीयत बिगड़ने से मेकाहरा में भर्ती कराया गया था। जहां 27 जनवरी दोपहर करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई। वहीं दूसरी मौत रुक्मणी सिन्हा ग्राम कुसुम कसाव बालोद की हुई है ।मृतिका के भतीजा देवेश सिन्हा ने बताया कि आंदोलन से लौटने के बाद उन्हें चक्कर और पेट में दिक्कत आ रही थी। जिला अस्पताल से 1 घंटे के बाद रेफर कर दिया गया। स्थिति खराब हो चुकी थी। आनन-फानन में राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज ले गए। इलाज चल रहा था, लेकिन 26 जनवरी दोपहर 2 बजे उनकी मौत हो गई। रामराज कश्यप ने बताया कि 2 आंदोलनकारियों की मौत के बाद भी सरकार नहीं जाग रही है। सरकार ने वादा किया था कि मानदेय बढ़ाया जाएगा, लेकिन सरकार वादा पूरा नहीं कर रही है। सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं की जा रही है।छत्तीसगढ़ के लगभग 86,000 रसोइया पिछले 30 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
रसोइया संघ का आरोप है कि धरना स्थल में पीने के लिए साफ़ पानी नहीं है। नहाने के लिए दिनचर्या के लिए भी व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से प्रदर्शनकारियों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। पर्याप्त शौचालय नहीं जो हैं। इसके अलावा ठंड और गर्मी से बचाव के लिए उचित छत, तंबू कंबल आदि की कमी है।
जबकि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा छत्तीसगढ़ द्वारा इस संबंध में स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि यह जानकारी पूर्णतः भ्रामक एवं तथ्यहीन है।लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार हड़ताल पर बैठे रसोईयों के प्रतिनिधियों की संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय एवं सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग से चर्चा हुई थी। इस दौरान शासन द्वारा रसोईयों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके मानदेय में 25 प्रतिशत की वृद्धि, अर्थात 500 रुपये की वृद्धि किए जाने की कार्यवाही की जानकारी दी गई थी तथा हड़ताल समाप्त कर अपने-अपने निवास स्थान लौटने का आग्रह किया गया था। इसके बावजूद कुछ रसोईयों द्वारा धरना स्थल पर बने रहने का निर्णय लिया गया।जिन दो रसोईयों की मृत्यु की खबर प्रसारित की जा रही है, उनमें से एक रसोईया बालोद जिले की निवासी थी, जो 20 एवं 21 जनवरी को धरना स्थल पर उपस्थित रही थी, किंतु बाद में अपने निवास स्थान लौट गई थी। वहां उसकी तबीयत खराब होने पर उसे दल्ली राजहरा स्थित शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान 27 जनवरी को उसकी मृत्यु हो गई। दूसरी महिला रसोईया बेमेतरा जिले के बेरला विकासखण्ड की निवासी थी, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। उन्हें भिलाई स्थित शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई।
उल्लेखनीय है कि दैनिक मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर रसोइया संघ लगातार धरना पर बैठे हुए हैं। वर्तमान में उन्हें सिर्फ 66 प्रतिदिन मिलते हैं जो कलेक्टर दर की मजदूरी से भी कम है। कम मानदेय की वजह से संघ कलेक्टर दर की मांग कर रहे हैं। यह हड़ताल 29 दिसंबर 2025 से शुरू हुई, जिससे राज्य के हजारों स्कूलों में मिड-डे मील सेवा प्रभावित हैं।