जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने वाले अलवर के मास्टरमाइंड को डूंगरपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

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डूंगरपुर, 15 जनवरी । जिला पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन साइबर हंट’ के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने जयपुर में बैठकर देशभर के लोगों को ठगने वाले एक शातिर बदमाश को गिरफ्तार किया है, जो खुद को बैंक अधिकारी बताकर भोले-भाले लोगों विशेषकर शिक्षकों और सेवानिवृत्त सैनिकों को लोन दिलाने और ब्याज दर कम कराने का झांसा देता था। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से 50,000 रुपये की नकदी और ठगी में इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। आरोपित ने ठगी के लिए बाकायदा एक फर्जी कॉल सेंटर बना रखा था, जहां वह लड़कियों से टेलीकॉलर का काम करवाता था।

जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित दिनेश चन्द्र शर्मा उर्फ प्रियांशु शर्मा (निवासी अलवर) ने जयपुर में ठगी का एक व्यवस्थित तंत्र विकसित कर रखा था। वह विभिन्न जॉब पोर्टल्स पर टेलीकॉलिंग के काम के लिए लड़कियों की भर्ती का विज्ञापन देता था। चयनित लड़कियों से वह बैंक के डिफॉल्टरों या लोन की जरूरत वाले लोगों को फोन करवाता था। जब कोई शिकार जाल में फंस जाता, तो आरोपित खुद फर्जी बैंक अधिकारी बनकर उनसे बात करता। वह लोगों को कम ब्याज दर पर ज्यादा लोन दिलाने या मौजूदा लोन की राशि ‘डबल’ करने का लालच देता और कागजी कार्रवाई के नाम पर एडवांस चेक और पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवा लेता था।

इस पूरे गिरोह का खुलासा तब हुआ जब नेजपुर निवासी एक शिक्षक दिनेश चन्द्र यादव ने शिकायत दर्ज कराई। शिक्षक को आरोपित ने एचडीएफसी बैंक का कर्मचारी बनकर फोन किया और 21 लाख रुपये का लोन दिलाने का झांसा दिया। आरोपित ने पीड़ित के नाम पर 23.54 लाख लोन स्वीकृत करा दिया और फिर अतिरिक्त राशि वापस करने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 3,47,927 रुपये अपने खातों में डलवा लिए। पैसे हड़पने के बाद आरोपित ने अपना मोबाइल बंद कर लिया।

डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी अनुसंधान शुरू किया। साइबर सेल और विशेष टीम ने जयपुर के विभिन्न स्थानों पर तीन दिनों तक भेष बदलकर आरोपित की निगरानी की। कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने आरोपित दिनेश चन्द्र शर्मा को जयपुर से दबोच लिया। पुलिस अब आरोपित से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और अन्य संभावित ठगी के मामलों का खुलासा किया जा सके।