पारंपरिक पकवान के रूप में बालिकाओं ने आलू की भरी पूरियां,सिलबट्टे में तैयार की गई तिल-भट-पुदीना-धनिया-लहसुन और मूली आदि की चटनियां,पीले कद्दू का रायता,मसाले वाली व्यंजन आदि तैयार कर परोसा गया। स्थानीय वेशभूषा और आभूषणों से सजी छात्रा मासूम नौटियाल सहित अन्यों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य नरेश रावत ने बालिकाओं की ओर से तैयार स्वादिष्ट व्यंजनों की प्रशंसा की। शिक्षक सुरक्षा रावत ने “जाड़ी संस्था” का आभार व्यक्त करते हुए पहाड़ के मोटे अनाज से प्राप्त पोषक तत्वों के बारे में बच्चों को बताया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी पहचान और विरासत को कायम रखना होगा।
शिक्षिका दीपिका जैन ने स्थानीय पकवानों की उपयोगिता के साथ “वोकल फाॅर लोकल” अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में खुशी,पूजा,कनिका,आरुषि,स्वाति,राधिका,वंशिका,ऋषिका,साक्षी,सोनाक्षी,मोनिका, मुस्कान,आयुषी,प्रतीक्षा,आरुषि, मोनिका,मानवी, साक्षी,नव्या,प्रियांशी,साक्षी,अंशिका, अनीशा, रिया,राधिका, साक्षी,सिमरन,श्वेता एवं स्मृति सहित कार्यक्रम में उपस्थित रहे।